Friday, February 1, 2019

मुक्त गजल

              बजट
वो पिटारा सा लेकर आए हैं
कि बजट पेश करने आए हैं

नए नए रंग और  नए  तराने
योजनाए  कई लेकर आए हैं

अमीर मिडिल वर्ग किसान गरीब
सबकी पो बारह लेकर आए हैं

हुआ कुछ सस्ता  महँगा सामान
कुछ नया पैगाम लेकर आए हैं

 भर गई कई की झोलिया खाली
चुनावी बजट  जो लेकरआए हैं

ताने देता रहे विपक्ष कितने ही
सरकार बजट  लेकर आए हैं

कर दिया  चारो खाने चित श्रीकांत
मोदी जी नया दाव लेकर आए हैं

मनोज दुबेश्रीकांत

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