Wednesday, February 13, 2019

गजल


मै जब होऊ गणित मैं
मै जब  होऊ अंक गणित तुम रेखा बन जाना 
जीवन के गुणा भाग मे दशमलव बन जाना

मै जोड़ घटाना सा होता रहू  जब कभी  कभी 
तुम सम  और  विषम  की संख्या बन जाना

मै  वृत आयात त्रिभुज चतुर्भुज  सा हो जाउ जब
तुम टिगनामेटरी जयामितीय सांख्यिकी बन जाना 

 मै दूरी समय गति  और वेग का पैमाना बनू जब 
तुम मापने को उन्हे मात्रा की इकाई बन जाना 

मै बनू  जब अंकगगणित समाकलन बीज गणित 
तुम गणितज्ञ की परिभाषा  और थयोरम बन जाना  

कर लेगा हल श्रीकांत जीवन के सब गणित पल में 
तुम   गणित के उत्तर की सरल सहज  रीति बन जाना 

मनोज दुबे श्रीकांत 




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