Friday, May 15, 2020

गजल

तुम्हारे सिवाय कोई ओर नही





तुम्हारे सिवाय   कोई और नही
तुम्हारे से अनुपम कोई और नही

आता हूं जब भी पास ही तुम्हारे
तुम्हारे से अलग  कोई ठौर नही

जानते हो तुम कोन हो मेरे लिए
अनमोल तुमसे कोई और नही

कह लेता हूँ मन भर के तुमसे ही
ओर किसी पर कोई जोर नही

दे दे बस खुशी के दो पल श्रीकांत
मांगता हूँ थोड़ा तुमसे कोई मोर नही








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