कोरोना का कोटि कोटि प्रणाम है
कल कोरोना वाइरस
अचानक मुझे घूमते फिरते मिल गया
और उसने मुझसे चोकते हुए प्रश्न किया
बोला भाई साहब मै जिस जिस देश गया
वहा सन्नाटा सा फेल गया
लोगो की जिंदगी को यू साफ सूंघ गया
लोग बाग घर से नही निकलते थे
मास्क लगाकर घूमते थे
हाथ नही मिलाकर हाथ जोडकर या पैर मिलाकर अभिवादन करते थे
छींकने खासने पर रूमाल रखते थे
और तो और भाई साहब जरा सर्दी
जुकाम होने पर डाक्टर को दिखाते थे
मगर भाई सा हब आपके देश के
लोग बिल्कुल बिंदास है
उन्हे लगता है कोरोना से डर ही नही है
मै तो सोच रहा था अन्य देशो के समान
सडकें खाली कर दूंगा
लोगो के मन मे भय भर दूंगा
मास्क से सबके चेहरे ढक कर
दवाई सेनेटाईजर की बिक्री बढा दूंगा
मगर मै भाई साहब आश्चर्य चकित हू
तुम भारतीय लोगो के बिदासपन से दंग हू
हा कोरोना भाई हम भारतीय का
बिंदास पन जग जाहिर है
हम इसी अंदाज के लिए ही
माहिर है हमे किसी बाहरी चीज से
फर्क नही पडता है मगर
अपने देश की बात का ही दंश लगता है
हम राजनीति समस्या से ही पीडित रहते है
जैसे तैसे अपनी जिंदगी जीते हैं
भूख गरीबी लाचारी की समस्या
तुमसे भारी लगती है और हमारी
जिंदगी बिना किसी खौफ
से बिंदास चलती है हमने
अंग्रेज डच फ्रांसिसी और न जाने
कितनों को अपने बिंदास
अंदाज का परिचय दिया है
इन्हे अपने देश से खदेड़ बाहर किया है
अब तुम अदने से वाइरस कहा
लगते हो हमारी रफ एंड टफ
जिंदगी मे कहा तक टिकते हो
कोरोना बोला भाई साहब होली की धूम
और तुम्हारे साहस के रंग ने
मेरा ही रंग उडा दिया
जग को ला रहा था रोना मै
तुमने कोरोना को ही रोना ला दिया
लगता है मेरा अब यहां कोई न काम है
आप भारतीयों के बिंदास अंदाज को
भाई साहब कोरोना का कोटि कोटि प्रणाम है
मनोज दुबे श्रीकांत

