Thursday, January 9, 2020

कुता का प्रणाम











हमारे हमारे घर के कुत्ते ने कल हमे
 पहली बार प्रणाम किया
उसने दोनों पंजों को खींचकर
 सिर को अपने पंजे पर धरा
 मैंने कहा भैया आजकल
 यह सुबह-सुबह चरण
 वंदना क्यों हो रही है
 क्या तुम्हारी कहीं हमसे अटक रही है
या फिर हमारी श्रीमती से
आजकल खटक रही है
या फिर तुम अपने आप
 को उठाना चाह रहे हो
या फिर हमारा चमचा
 बनने की सोच रहे  हो
 हमारे इतना कहने पर वह
भौ भौ करने लगा गुस्से
में हमें इस कदर
डराकरककहने लगा
 दुबे जी भाभी जी की संगत में।
आप पूरे ही सठिया रहे हो
 हमें जरा सी बात पर
 सो सो बात सुना रहे हो
 भैया हमारी शराफत का
गलत फायदा मत उठाइए
 तुम्हें प्रणाम कर रहे हैं
 हम यह अपना अहोभाग्य मनाईए
हम कुत्ते  होनै को
तो सच्चे वफादार होते हैं
 मगर कुत्तेआई पर अपनी आ जाए तो
 सबसे खतरनाक होते हैं।

मनोज दुबे श्रीकांत

क्यो थमा रहे हो डंडे



थमा रहे हो डंडे क्यो कलम की जगह हाथ में
रंग स्याही का बदल रहे हो क्यों रक्त में
 देश के छात्रों को पढ़कर गढ़ने दो भविष्य
राष्ट्र को ढकेल रहे हो क्यो सब  गर्त में
दाल गलाने को अपनी वोट बैंक की 
करा रहे हो दंगे क्यो शिक्षक संस्थान में
जेएनयू और जामिया के साथ देश झुलसा ल
गा रहे हो आग क्यो देश की फिजां  मे
खुली हवा में ले रहे हो सांस आजाद की
 आजादी छीन कर लेने की चाह क्यो देश में
इरादे बदल डालो अपनी राजनीति के श्रीकांत
मिटा रहे हो क्यो  अपने आपको इतिहास मे

मनोज दुबे श्रीकांत 

Tuesday, January 7, 2020

कविता



 बेटे का रिजल्ट और कुत्ते का गुस्सा

बेटे का रिजल्ट और कुत्ते का गुस्सा

हमारे बच्चे के रिजल्ट आने
के पहले मै डाटे जा रहा था
यह देख हमारा कुता
बहुत ही बेचने हुआ जा रहा था
वो कभी कभी मुझे देख कर
गुर्रा रहा था कभी दुम
हिलाता मेरे पास आ रहा था
तू  टेस्ट  तिमाही छह माही मे
 फेल हुआ तो हुआ प्री बोर्ड
मे भी फेल हो गया मैने
बनाना चाहा होशियार  इंटेलीजेंस
पर गधा हीरहा तू स्कूल
 कोचिंग जाकर भी कुछ नही कर पाया
हिंदी अग्रेजी को छोड़
किसी अन्य विषयों मे भी
पास न हो पाया
 मै तुझे साईंस से
पढ़ाकर डाक्टर इंजीनियरिंग या
प्रोफेसर बनाना चाह रहा था
मगर तु आर्ट्स कामर्स से भी बेकार
बेरोजगार सा हुआ जा रहा था
बता तेरे साथ क्या करू
किस प्रकार से तुझे समझाया करू
क्या तेरी अक्ल पर पत्थर पड गए है
 या तुझे पढाने वाले शिक्षक  गोण हो गए है
 अब तुझे और आगे नही  पढाऊंगा
अपने पैसे व्यर्थ नहीं गवाउंगा
हमारी इस बात पर हमारे कुत्ता
 से रहा नही हमे टोकते हुए
उसने प्रश्न किया फैल पास होने पर
आप भैया पर इतना मत झललाईये
उसकी पढाई बंद मत कराईये 
वह आगे कुछ अच्छा कर जाएगे
इस बार फैल हुए है अबकी पास हो जाएगे
 वैसे आपने भी पढकर कहा के
 तीर मार लिए है डिग्रियों के ढेर
अटैची मे लगा रखे है
बाबू जी डिग्रियों से
 हुनर बेहतर होता है प्राइवेटनोकरी से
 सरकारी रूजगारअच्छा होता हैं
 मैने कहा अब
हमे तू भी सीख देने लगा है मेरी
 घरेलू बातो मे दखलंदाजी करने लगा है
तेरी यह आदत मुझे बिल्कुल
अच्छी नही लगती है.
 बात  बात पर तेरी सीख
मेरे मन मे खटकती है
अगले दिन  स्कूल से
आने पर मेरा कुत्ता और बेटा दोनो
मिठाई खा रहे थे
 यू समझो की मुझे चिढा रहे थे
मैने उन्हे टोकते हुए श्रीमती जी
 से पूछ ही लिया भैया ये
आज घर मे खुशिया किसकी
 मन रही है  आखिर किस बात पर
मिठाईया उड रही है
मेरी इस बात पर श्रीमती मुसकुराई
आपका बेटा बारहमाई परीक्षा
के रिजल्ट मे पास हो गया है फरमाई

मेरे परिवार के हर सदस्य के साथ
 मेरा कुत्ता भी  आज भरपूर गर्रा रहा था
मेरा रिजल्ट की पूर्व संध्यशा का गुस्सा
काफूर हुआ जा रहा था

मनोज दुबे श्रीकांत





Monday, January 6, 2020

कुत्ते की जिद










कुत्ते की जिद

हमारे घर का कुता।
जिद पर अड़ा रहा
रोटी के नाम पर दिन
भर भूखा पडा रहा
कहने लगा अब मे
रूखी रोटी नही खाऊंगा
अंडा मछली  दूध ब्रेड के साथ
पडोस वाले कुत्ते के समान।
पेडिगरी  खाऊंगा
खुद विगत क ई वर्षो
से माल उडा रहै हो
मेरे नाम से दो रोटी के
 टिक्कड़ पकडा रहे हो
तुम्हे पता है मेरे साथ के
जानी रोनी टिंगू मुटिया रहे है
दूध रोटी अंडा मांस सब खा रहै है
सादे खाने से मेरा तन
सूख रहा है और मेरा पर
 भी अब पहले जैसे
 झबरीला कहा रहा है
मैने कहा भैया मैने तो
पहले ही तुझे सम
झाया था तु कही और रह ले
समझाया था मगर तू मेरी।
सादगी पर रीझ गया था
पडोस वाली मंजिल को छोड
मेरे घर आ गया था
अब काहे को पछता रहा है
अपने भाग्य को कोस रहा है
मै प्राइवेट स्कूल का मास्टर तुझे
इतना ही सुख दे सकता हूँ
कम तनख्वाह मे रूखी
रोटी और ईमान
 का नमक दे सकता हूँ
मेरे साथ रहने पर तुझे।।
एक फायदा जरूर होगा
 नमक हलाल होगा कभी।
नमक हराम न होगा

मनोज दुबे श्रीकांत


Sunday, January 5, 2020

कविता सी ए ए

         सी ए ए के नाम पर



क्यो तोड़ रहे हो देश सी ए ए के नाम पर
क्यो लगा रहे हो आग सी ए ए के नाम पर

बहुत होगया उत्पाद अब और  बर्दाश्त नही
क्यो कर रहे हो तांडव  सी ए ए के नाम पर

करते हो बात तुम सब मिल कर एकता की
क्यो बाट रहे हो देश सी ए ए के नाम पर

कोई नही भय है जब कानून से देश मे अपने
 क्यो काप रहे हो  सी ए ए के नाम पर

कहते हो तुम सब देश भक्त हो  एक दम पक्के
 क्यो बन रहे हो गद्दार सी ए ए के नाम पर

कहते हो लोकतंत्र के पुजारी अपने आप को
 क्यो  संसद का अपमान   सी ए ए के नाम पर

बदनाम किया बहुत देश तिरंगा और बापू को
क्यो खेले हिसा  का खेल सी ए ए के नाम पर

ये कुर्सी और वोट बैक सब धरा रह जाएगा
क्यो पब्लिक को बने मूर्ख  सी ए ए के नाम पर

बाट गए देश पहले ही धर्म के नाम  उनने  ही
  क्यो कर रहे हाहाकार  सी ए ए के नाम पर

एक देश एक कानून ऐक संविधान देश का
क्यो राग अलापे  राज्य सी ए ए के नाम पर

राष्ट्र वाद देश हित की खातिर मिट जाएगे श्रीकांत
बटने न देगे देश हम  फिर सी ए ए के नाम पर


मनोज दुबे श्रीकांत










Saturday, January 4, 2020

प्रश्न पत्र















मै नही गुरू अब

प्रश्न पत्र मे मोती लाया
मैने तुम्हारी परिक्षा मे
उत्तर दे तुम खुशियाँ चुन लो
या बिखेर आगन मे

मैने तुमको बहुत समझाया
पर  न समझे नादानी मे
ओवर कानफीडैस मे अपना
समय गवाया मस्ती मे

कभी बुददीमता दिखाई न तुमने
मेरे टेस्ट और परिक्षा मे
फिर काहे को आश लगाई
प्रेक्टिकल के नंबर मे

भरने को भरदी झोली तुमने
ज्ञानी  समझा पढाने मे
हमे अंगूठा टैक समझा
तुमने भरी कलासो मे

अपमानों के कडवे घूट को
मैने उतारा हलको मे
शब्दो की उपाधियों से कितनी
तुमने नवाजा कक्षा मे

मै न भूलूंगा और न तुम
हम दोनो ही थे लाचारी मे
लिया दिया सब यही बराबर
गीता के उपदेशों मे

न दूंगा वरदान श्राप तुम्हे
 न द्वेष हर्ष अपने मन मे
भाप लेना तुम मुझको
 अपनी सफलता असफलता मे

मनोज दुबे श्रीकांत

Friday, January 3, 2020

कुत्ता का गुस्सा

हमारे घर के कुत्ते ने हमे काट लिया
यह देख हमारा माथा ठनक
 गया हमने उसे चमकाया
 डाटते हुए धमकाया
नालायक हमारे घर की 
खाकर हमे ही आख दिखाता है 
किसी और को नही हमे ही काटता है 
क्या तू आजकल नमक 
हराम हो गया है या हमारे 
लाड प्यार टुकड़े को भूल गया है
 जा भाग जा तेरे को जहा जाना 
हो वहा जा मेरे घर मे। 
कल से मुह न दिखा 
मेरी इस बात पर वह डरने लगा 
आख मे आसू ला कहने लगा 
भैया तुम मेरी जरा सी गलती 
पर ही मुझे घर से भगाने लगे 
एक दात लगने पर ही हंगामा करने लगे
दुबे जी मेरे देश के कुछ लोग 
भी आज मेरे देस के लोगो 
को मार काट रहे हैरह रहे है। 
यहा मगर बात कही 
ओर की कर रहे हैं उनके 
लिए क्या आपका कोई उसूल 
कानून नही है या आप उन
 पर कार्यवाही या देश से 
निकालने के काबिल नही है 
आजादी के नाम पर देश मे
 यह सब क्या चल रहा है। 
दंगे फसाद देख देख कर 
मेरा खून जल रहा है मेरी। 
गलती माफ कीजिए दुबे जी। 
 और जाकर अपना घर गृहसती। 
का काम कीजिए दुबे जी तुम्हे 
सिर्फ हम कुत्तों के ऊपर ही। 
शेर बनना आता है देश हित 
के नाम पर तुम्हारा 
 खून  जाने क्यू सूख जाता है 
थोड़ा सा अपना शेर पना देश 
के गद्दारों को भी दिखा दीजिए। 
हम कुत्तों पर कब तक सनक
 कर घर से भगाते रहेगे
 कुछ मेरे देश के दुश्मन को
 भी  देश के घर से भगा दीजिये

मनोज दुबे श्रीकांत 

कविता

मोबाइल की पुनर विचार याचिका 

हमारा मोबाइल ने हमारे निर्णय
 पर पुनर याचिका दायर की
उसमे उसने अपनी बात कुछ
इस प्रकार की कहने लगा
 भैया आजकल तुम मुझे घर
 से ले जाकर डिब्बे मे बंद
कर देते हो मेरा दम ही उस डिबबै
 मे घोट देते हो मेरे जैसे कई
 मोबाइल उस डिब्बे मे पडे रहते हैं
हम अपना अपना दुखड़ा
ऐक दूसरे से कहते रहते हैं 
 बाहर कब निकलेंगे
इंतजार करते रहते है
एक एक कालखंड भैया
भारी पड़ता है और दिन कुछ
लोगो के मोबाइल की ही
घंटी सुन सुन कर के गुजरता है
आप तनक मेरी और मेरे जैसे
अन्य साथियों की दशा पर विचार
 कीजिये और मुझे इस
घुटन से मुक्त कीजिये
मैने कहा भैया मै तुम्हारी
लाचारी को समझता हूँ 
 मगर कुछू कर नही सकता हूँ 
मै भी बहुत ही मजबूर हू
मै तुम्हारी पुनर विचार याचिका
को उपर तक पहुँचा दूंगा
यदी हुआ तो तुम्हारे डिब्बे की
 घुटन से मुक्ती का जतन कर दूंगा
मगर हल मुझे कुछ नही दिखता है
तुम रहोगे यू ही बंद
डिब्बे मे ऐसा लगता है
क्योंकि पुनर्विचार याचिका
अपने देश मे रद्द होती है
जीत कैसे भी हो भैया
कानून की होती है
हम अगले दिनो मे तुम्हे
खुली हवा मे सास लेने के लिए 
 घर  पर ही छोड़ देगें 
और तुम्हे उस डिब्बे की
घुटन से मुक्त कर देंगे

मनोज दुबे श्रीकांत

कविता

कुत्ते की चिंता

हमारे घर के सामने से
मोहल्ले का कुत्ता अपने
 साथ छह और बच्चो।
को लेकर निकल रहा था
 हमारा यह देख माथा।
ठनक रहा था
 हमने उसे रोका।
टोकते हुए बोला
 भैया क्या पी आई जी
की बराबरी कर रहे।
हो हमने सुना था आपके
 छह के बारे मे आप।
तो बारह को लेकर घूम रहे हो
हमारी इस बात पर
 कुत्ता गुर्राया।
क्रोधित हो फरमाया
भेया ये मेरे नही है
मेरे तो छह है
 बाकी के पडोस
 वाले मोहल्ले वाली के है
 ये तो मेरे साथ हो लिए है
तुम्हे पता है देश मे नए नए
कानून बन रहे है
हम दो हमारे दो के नारे
जोर शोर से चल रहे हैं
तो क्या भैया तुम्हारी जमात
के समान हमारी भी
नशबंदी कराओगे
क्या हमारी
जनसंख्या पर भी
 प्रतिबंध लगवाओगे
तुम्हे पता नही है
जनसंख्या के नाम पर।
देश मे क्या क्या हो रहा है
हमारा स्तर लगातार बढ़ रह है
कुछ तो परिवार नियोजन।
के बारे मे सोचा करो
समय को देखते हुए
छह की जगह दो पैदा किया करो
हमारी इस बात पर बो
आग बबूला हो गया
मेरे पेर को काटने
को उतारू हो गया
बोला परिवार नियोजन का
भय हमे मत दिखाया करो
बच्चो के नाम पर हमे
 मत डराया करो
हमारे बच्चे भगवान की।
कृपा से पल बढ़ जाते है
 कुछ  पालतू कुछ जंगली कुछ
मोहल्ले के आवारा कुत्ते बन जाते है
श्रीमान दुबे जी  आप अपनी
चिंता हम पर मत थोपिए
परिवार नियोजन की बात
अपनी ही जमात तक सीमित रखिए। 

मनोज दुबे श्रीकांत

व्यंग

 [12/9/2020, 11:56 AM] Manoj Dubey: आन लाईन कलास का पंगा  कल आन लाईन कलास मे  हमने कैमरा आन करने का  बोला कुछ छातरो का  मन भय से डोला  पंद्र...