Monday, March 25, 2019

मुक्त. गजल

राम जी जाने

जाने होगा क्या  अब राम ही जाने
कोन की बने सरकार अब राम ही जानै

मंदिर मस्जिद पर जो लड लड बैठे 
उनके मन की   बात अब राम ही जाने

टैट मै बैठे  इंतजार  मे निकल गए वर्षो
 सुप्रीम कोर्ट का फैसला अब राम ही जाने

कुर्सी के लालच नेता बदलते रहे धर्म
 हिंदु मुसलमान कोन  अब राम ही जाने

 उखाड़ फेके किसे जनता किसे दे दे कुर्सी
 क्या चुनाव का फैसला अब राम ही जाने

क्या राहुल क्या मोदी क्या ममता अखिलेश
होगा कोनपी एम  देश का अब राम ही जाने

छला गए  वोट मे राम ओर रहीम दोनो श्रीकांत
क्या मंदिर क्या मस्जिद  अब राम ही जाने

मनोज दुबे श्रीकांत

Tuesday, March 19, 2019

मुक्त गजल

दर पर आने से पहलै अपना बटूआ नही दिल खोल लेना
मै नही तेरे रूपयो दो रूपयो का भूखा वो गरीबो को दे देना

मेरे दर पर दान देने वालो की लाइने लगी है लंबी और चोडी
तेरी सीरत को जरा उनकी सीरत से मिलाकर के देख लेना

ये दिखावै का दान धर्म प्रसाद मिन्नते रखले पास अपने ही
कभी कभी खाली हाथ  दर पर मेरे आकर के देख लेना

मै कर दूँगा हिसाब तेरा सब दिया लिया बराबर अब तक
फुर्सत मिलेगी दुनिया से तुझे तब मुझसे चैन से मिल लेना

लिखा रखा है मैनै लेख क ई जनमो का अपने बही खाते मे
अपने नसीब का ही तु हर जन्म मे मुझसे आकर के ले लेना

तु खीज लेना चिल्ला लेना कह देना मुझे भला बुरा क ई बार
सबक  पिछले जन्म के कर्मो का  एक बार तू देख लेना

मै तुझे दे सकता हूं स्वर्ग नर्क लोक परलोक धन दोलत सब
बस एक बार दू छोड छाड के सब  विकार मुझे अपना लेना

भगवान होते है अदितवीय अदभुद अतुलनय अनंत श्रीकांत
कभी प्रेम से तू उन्हे अपना बनाकर  के एक बार देख लेना

वो आएगै दोडे चले हरने को तेरे दुख दर्द और क्लेश सारे मन
कभी एक बार उन्हे अपने सच्चे मन से पुकार के तु देख लेना
मनोज दुबे श्रीकांत






Monday, March 18, 2019

गजल

पल दो पल को बैठ भी ले पास मेरे आकर
सुख दुख  सारे बाट भी ले मेरे पास आकर
मै दे दूँगा तुझे सब कुछ सहजता से ही
छोटा बनकर  माग भी ले मेरे पास आकर
रखूगा कुछ नही तेरा जो कुछ दिया लिया
हिसाब तेरा भी कर ले मेरे पास आकर
लेखा जोखा सब कुछ लिखकर बैठा हूँ मै
मिले जो तुझे ले भी ले पास मेरे आकर
स्वर्ग नर्क लोक परलोक बैकुंठ सब पास मे
 फिर चाहे मुझको ही मांग ले पास मेरे आकर
मै राम कृष्ण शिव विष्णु ब्रम्हा सब कुछ हू
अनेक रूप देख तू भी ले पास मेरे आकर
तुम कर दोगे निहाल श्रीकांत को बिन मांगै
कभी  जान लो  हाल तुम भी मेरे पास आकर
मनोज दुबे श्रीकांत


लोग कहा अच्छे बुरे होतै है
अच्छे बुरे तो व्यवहार होते हैं
नीर के समान ढल जाते है
 लोग जो मन से निर्मल होते हैं
कुछ सुनाकर निकाल लेते भडास
कुछ सुनकर खुश हो जाते है
मुद्दा ए बहस मे  और के जनाब
रिश्ते कुछ खराब हो जाते है
क्या ईमान क्या धर्म क्या
राजनीति मे सब एक हुए जाते है
हुआ क्या पूछ तो ले हाल मेरा
कुछ लोग हवा हुए जाते है
कुछ चले गए कुछ जाने को है श्रीकांत
स्वर्ग नर्क सब एक हुए जाते है
मनोज दुबे श्रीकांत 

Friday, March 15, 2019

लोक गीत

सखी जब  जब चुनाव आए जात है
कन्फ्यूज हम होए जात

बी जेपी कांगेस को रोल
वादे हो रहे गोलमगोल
सपा बसपा को लोटा गोल
मेनिफेसटो पर धूल पड़ी जात है

राहुल सोनिया के हाल बेहाल
अखिलेश माया उलझे मकडजाल
मोदी शाह हो रहे खुशहाल
ममता केजरी के प्राण सूखत जात है

सखी जब जब चुनाव आए जात है
कन्फ्यूज हम होए जात

सुप्रीम कोर्ट की जय जय कार
सरजीकल स्ट्राइक  की मार
आतंकी की मची जूतम पैजार
हाल पाकिस्तान को कहो नही जात है

सखी जब जब चुनाव आए जात है
कन्फ्यूज हम होए जात है

चिल्ला चिल्ला के मर गए सारे
टुकडा टुकड़ा गेंग जुड गए सारे
जुड गकर फिर बिखर ग ए सारे
मोदी की जीत इनसे पची न जात है

सखी जब जब चुनाव आए जात है
कन्फ्यूज हम होए जात है

देवे अपनो कोन को वोट
हर एक हम पर कर रहे चोट
नेता सबमे एकई खोट
 जनतंत्र लोक तंत्र मे पिस पिस जात है

सखी जब चुनाव आए जात है
कन्फ्यूज हम होए जात है








Tuesday, March 12, 2019

गजल


तख्त ए ताज मेरा सब ले लो

तख्त ए ताज  तुम मेरा सब ले लो
शहर  गली मोहल्ला मेरा सब ले लो

छोड दो बस दो लबज मोहब्बत के
इश्क हुस्न  शबाब मेरा सब ले लो

सबब इतना कि तु  न ला मुझको
खत गुलाब डायरी  मेरा सब ले लो

गुजरना न कभी भूलकर राहो से मेरी
चौक चोराह मंजिल मेरा सब ले लो

दे दो एक झरोका झाकने को तुम्हे
खिडकी दरवाजा मकान मेरा सब ले लो

छिपाकर भी छिपा न सकोगे तुम कभी
मोहब्बत के जो नाम दिया मेरा सब ले लो

जी लूंगी  फकीरी मे ही जीवन को अपना
 तुम नींद  सुख चैन ख्वाब मेरा   सब ले लो

मन्नत खुदा से मागती हूँ श्रीकांत हर वक्त ही
महफूज  रखना उन्हे  खुदा दुआ मेरी सब ले लो

मनोज दुबे श्रीकांत




Monday, March 11, 2019

मुक्त गजल.

हे राधे तुम जमना किनारे आ जाती
तान मुरली की मधुर तुम सुन जाती

मै होता तुम होती और न होता कोई
रास उस दिन तुम  साथ.रचा जाती

मैं कहता कुछ तुमसे अपने मन की
तुम कुछ अपने मन की  कह जाती

होती लहरे जमना जी की कदम पेड
किसी शाम को तुम अकेली आ जाती

कह देता जाने से पहले कुछ बाते तुमसे
तुम मथुरा जानें से पहले मिल जाती

पहुचाया था संदेश लेकर अकरूर जी को
 काश तुम मेरे मन को जरा समझ पाती

मनोज दुबे श्रीकांत



Sunday, March 10, 2019

कविता

होनै को मै एक कुत्ता हू
कान सीधे दुम टेडी रखता हूँ
गुररा लेता हूँ कभी अपनो पर 
औरो पर भोक लेता हूँ

होने को मै एक कुत्ता  हू
जानी रोनी टाइगर  नाम  मेरे
पर गुस्सा मे कुत्ता
नाम से पुकारा जाता हूँ

होने को मै एक कुत्ता हूँ
करता हूं लाड प्यार
 चुकाने को नमक की कीमत
बदतमीजी करने पर काट लेता हूँ 

होनै को मै  एक कुत्ता हूँ
गली मोहल्ल का आवारा
मेम साहब का प्यारा 
मालिक का राज दुलारा हूँ 

होने को मै एक कुता हूँ 
देशी विदेशी शहर गाव का हूँ 
रहता बिल्डिंग मे घूमता कारो मे 
 अपने इलाके का बादशाह हूँ 

होनै को मै एक कुत्ता हूँ 
धर्म जाति आरक्षण मे बटा नही 
एक रंग मे रंगी अपनी
संस्कृति की पहचान हू 

 होनै को मै एक कुत्ता हूँ
सब जानवरों मे स्थान रखता हूं
आदम जात की मिशालो मे 
वपादारी का इनाम रखता हू

मनोज दुबे श्रीकांत 

Saturday, March 9, 2019

गजल

आज संडे तुम मना ही लो

सब्र का इम्तहान अब तुम मेरा ले ही लो
आज चाहे जितना जी भर कर सो ही लो

उठ आया हू मै सुबह जल्दी से आज भी
तुम अपना भरपूर संडे तो मना ही लो

दूध लाकर बाजार से चाय बना ली मैने
  तुम गर्मा गर्म चाय  बिस्कुट तो ले ही लो

मुझे इंतजार है तुम्हारा उठकर कहने का
 कुछ काम आज तुम भी तो कर ही लो

परेशान रहती हूं रोज के कामों से ही मै
बच्चो के कामों को आज तुम देख ही लो

सुधार कर कुछ सब्जी ओर भाजियो को
किचन थोड़ा सा तुम भी संभाल ही लो

रहतै हो तुम भी तो व्यस्त सप्ताह भर के
कुछ समय हमारे लिए भी तुम निकाल ही लो


कर देगा श्रीकांत काम सब तुम्हारे कविता
तुम्हे कहना है जो जो सब आज कह ही लो

मनोज दुबे श्रीकांत 

Thursday, March 7, 2019

कविता

महिला दिवस की शुभकामनाएं

तुम मुस्कुराती रहो

तुम मुस्कुराती रहो फूलो सी
मै सुमनगंध बिखेरता रहूँ
खुशियों कै मोतियों को
 अपने आंगन मे बिखेरता रहूँ

  तुम बुनती गढती रहो ख्वाब
 मै साकार उन्हे करता रहूं
दामन तुम्हारा खुशियो से
 मै रोज रोज भरता रहूँ

 तुम चलती रहो तूलिका सी
मै कैनवास  सा होता रहू
जीवन के बेरंग बिम्ब मै
 सात रंगो उकेरता रहूँ

तुम होना रिमझिम फुहार
मै सावन सा होता रहूं
मेघदूत सा बन कर प्रिय
प्रेम को बरसाता रहूँ

 तुम  होना जूही लाजवंती सी
  मै बसंत सा होता रहूँ
होकर के रंग हरा लाल
फागुन मे बरसता रहूँ

तुम होना कभी  नदियो सी
 तो मै सागर सा होता रहूं
क्षितिज बन दूर  कही
आकाश धरा सा मिलता रहूँ

जीवन की परिणय बेला मे
 मै वचन सात सा होता रहू
थामकर हाथ तुम्हारा धामकर
बस दूर तक चलता ही रहू

तुम होना रिश्तो की कडी सी
मै घर  आंगन सा होता रहू
हौ संगनी तुम श्रीकांत की कविता
साथ  तुम्हारा ईश से मांगता रहूँ

मनोज दुबे श्रीकांत

Monday, March 4, 2019

गजल

तमन्ना
तमन्ना तो है  कि घुसकर मारकर आऊ
पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करके आऊ

आतंक की फैक्टरी के जो कारखाने बने
बम गोलो मिसाइल से उडाकर आऊ

एक कर  दू फिर  अपने हिंदुस्तान को
लाहोर कराची रावलपिंडी जीत कर आऊ

मागते है जो हिसाब शहादत का सेना से
लाश उनके ही घर पर बिछा मै के आऊ

राजनीति मे जो घसीट रहै है देश को
घसीट घसीटकर उनको मारकर आऊ

बढेते रहे आगे देश मेरा दिन ब दिन यू ही
गददारो को मन ही मन मै जलाकर आऊ

लडाते रहते जो हिंदु मुसलमान को देश मे
धर्मनिरपेक्षता का उनका मुखोटा लोचकर आऊ

गीत जो गा रहे  खाकर माल  अपने देश का
 उनको निकाल देश से पाकिस्तान छोडकर आऊ

तमन्ना श्रीकांत  बस इतनी चुनाव मे अबकी
हिसाब मांगने वालो का हिसाब पूरा कर आऊ

मनोज दुबे श्रीकांत
शनिचरा मोहल्ला कोरीघाट होशंगाबाद म प्र

गजल

क्या दे सबूत

देश के कुछ लोग को सबूत चाहिए
अपने नाम की  ही पहचान चाहिए
देश धर्म ईमान से कोई मतलब नही
जीत के लिए इनको बस वोट चाहिए
सेना पी एम से मांगते रहते हैं हिसाब
राजनीति करने का एक मोका चाहिए
रहते खाते पीते सोते है हिंदुस्तान मे
गुणगान करने को पाकिस्तान चाहिए
अमन देखकर होता है पेट मे दर्द इनके
तुष्टीकरण का ईनहै जुलाब चाहिए
डर है मिल न जाए हिंदु और मुसलमान
गिन लेते शहादत को सत्तर सालो मे
लासो का  जिन्हे सेना से हिसाब चाहिए
हिसाब दैना बराबर चुनाव मे अबकी इन्हे
टुकडे टुकड़े गैंग का फटटा साफ चाहिए
वतन पर जिनहे अपने अभिमान नही श्रीकांत
सुकून पाने को जिन्हे लोगो की लाश चाहिए
मनोज दुबे श्रीकांत






Saturday, March 2, 2019

कविता

हाल मेरे देश का बदला है दोसतो
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हाल मेरे देश का कुछ बदला है दोसतो
 खौफ नही जीत का जोश है दोसतो
सौर्य है ताकत है साहस है मन मै
मिटाने को दुश्मन कोसंकल्प है दोसतो

तेजस है मिराज है सुखोई साथ मे
उडने को अनंत आकाश है दोसतो
करने को दो दो हाथ दुश्मन से
फोलाद सा हमारा सीना है दोसतो

अग्नि है आकाश है प्रथवी है साथ मे
साधने को अचूक टार्गेट है दोसतो
धरती आकाश और सागर की लहरों पर
सेना की पदचाप का सोर है दोसतो

गुलाब है  कमल  है पंजा है साथ मे
शांति का कबूतर और बंदूक है दोसतो
लडलै वोट पर एक दूसरे से दिखाने को
देश के लिए  हम सब एक है दोसतो

 बदूक है टैक है तोप है मिसाइल
गर्जना करने को गोला बारूद है दोसतो
मिटाने को  जैश आतंकी पाकिस्तान को
हिन्दुस्तानियो का जज्बा ही काफी हे दोसतो

मनोज दुबे श्रीकांत

व्यंग

 [12/9/2020, 11:56 AM] Manoj Dubey: आन लाईन कलास का पंगा  कल आन लाईन कलास मे  हमने कैमरा आन करने का  बोला कुछ छातरो का  मन भय से डोला  पंद्र...