Thursday, February 21, 2019




दिखाएगा रंग कितने तू अपने मुझखो 
एक दो तीन चार पाच छह सात मुझको  

मैं ढाल लूगा  होकर इंद्र धनुष सा रंग 
 अपने से अलग समझ न तू  मुझको

 लाल नीला हरा पीला जामुनी हो जा 
 दमकूगा सफेद सा मिलाकर मे तुझको 

चाल रंग ढाल वेष भूषा सब जानता 
समझना ऐसा वैसा अब तो तु  मुझको

रंग तेरे मेरे सबके मिल जाएँगे श्रीकांत 
रंगेगा  अपने प्रेम रंग मे जब तु मुझको 

मनोज दुबे श्रीकांत 

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