नर्मदा के घाट से
नर्मदा गीत
नर्मदा मे डुबकी लगा के
तनक पुन्य कमा लो रे
पाप धाप सब धो के
आपन भाग्य जगा लो रे
पान प्रसाद ध्वजा
धूप दीप फूल बाती ले आओ रे
माई के दरश के काजे
आज दोडे चले आओ रे
माई रेवा सुन के तुमरी
सब पुकार बिगड़ी बना देहे रे
सोहे भाग् कई जन्म के
सबके जगा देहे रे
माई रेवा माई सी अपनी
ममता बरसा दे हे रे
झोली जिन जिन की खाली
सबरी भर देहे रे
निपूतन को पूत
निर्धन को धन दे देहे रे
रोग दोष ताप हर के
सुख की छाव कर देहे रे
काट के तुमरे पाप सब
पुन्य जगा दे हे रे
तट के कंकर से शंकर कर
भव पार कर देहे रे
मनोज दुबे श्रीकांत
नर्मदा गीत
नर्मदा मे डुबकी लगा के
तनक पुन्य कमा लो रे
पाप धाप सब धो के
आपन भाग्य जगा लो रे
पान प्रसाद ध्वजा
धूप दीप फूल बाती ले आओ रे
माई के दरश के काजे
आज दोडे चले आओ रे
माई रेवा सुन के तुमरी
सब पुकार बिगड़ी बना देहे रे
सोहे भाग् कई जन्म के
सबके जगा देहे रे
माई रेवा माई सी अपनी
ममता बरसा दे हे रे
झोली जिन जिन की खाली
सबरी भर देहे रे
निपूतन को पूत
निर्धन को धन दे देहे रे
रोग दोष ताप हर के
सुख की छाव कर देहे रे
काट के तुमरे पाप सब
पुन्य जगा दे हे रे
तट के कंकर से शंकर कर
भव पार कर देहे रे
मनोज दुबे श्रीकांत
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