Thursday, September 16, 2021

व्यंग

 [12/9/2020, 11:56 AM] Manoj Dubey: आन लाईन कलास का पंगा 


कल आन लाईन कलास मे

 हमने कैमरा आन करने का

 बोला कुछ छातरो का

 मन भय से डोला

 पंद्रह बीस छात्रों मे से

 क ईयो ने कैमरा नही खोला

दो चार छात्रों मे जिनने खोला

उनमे से किसी का

भाई बहन ही बोला

 ऐक छात्र की लिंक पर

उसका पेरेंट आ गया

मेऔर मेरे से ऊल जूलूल

बाते कहने लगा

विगत पंद्रह दिनो

 से मै ही बच्चे की

कलास जवाईन कर रहा हूँ

और आन लाईन कलास के

नेटवर्क मे उलझ रहा हूं

कभी कुछ समझ  नही आता है

 मेडम सर क्या पढा रहे है 

दिमाग मे नही आता है 

 और तो और आजकल स्कूल

प्रशासन फीस पर

दवाब बना रहा है

शिक्षको को पेमेंट देने

की बात बता रहा है

पर सर जी हमे पता है विदयालय

आपको कितना वेतन दे रहा

लाक डाऊन का भार हम

और आप पर एक सा पड रहा है

फीस जमा नही करने पर 

 बच्चे को आन लाईन

 कलास से भगा रहा है

वो तो आप ने कैमरा

आन करवा के

सबको आज देख लिया

वर्ना गुडडू उनके दोस्तो को

  बुला  रहा था

 और मैदान पर क्रिकेट क्रिकेट

 खेलने की बोल रहा था

अभी अभी आपकी कलास के

 तीन बच्चे मेरे घर

पर बतिया रहे है

और उनके  भाई

बहन कैमरा आफ

कर आन लाईन कलास

जवाईन रहे है

 सर जी लाकडाऊन मे

 हाफ पेमेट का दर्द हम

 भी समझ रहे है

 पर बच्चे तो बच्चे भाई बहन

 पेरेंट सभी आन लाईन

कलास सेत्रस्त हो रहे है

इस आन लाईन व्यवस्था ने

बच्चो को इंटर्नेट का कीडा बना दिया है

 पढना बढना रहा ऐक तरफ

पूरा फेसबूकिया बना दिया है

 मोबाईल हमारै घर मे कलेश

 का कारण बन गया है

 और सर जी  आजकल

हमारा बेटा हमारा ही बापबन गया है

 अब इस ताम झाम को

यही बंद कर दीजिए और सकूल

खोल कर  हमारे बच्चे को वही

अनुशासित शिक्षा और

 उज्जवल भविष्य दीजिए

 हमे पता है हमारे बच्चो को

आपकी रोक टोक डाट डपट

सजा दंड  और अनुशासन के

साथ सीखता है घर पर वो कहा

किसी की सुनता है किताब के

साथ साथ बसता कई दिनो से

 बंद पड़ा और मेरे बच्चे का

उज्जवल भविष्य केवल

मोबाइल पर ही अडा है

  सर जी हम आपकी साल

भर की  पूरी की

 पूरी फीस भर देगें

सर  गरआप हमे इस

 आन लाईन कलास की

मुसीबत पीछा छुड़ा देंगे 


मनोज दुबे श्रीकांत

[12/19/2020, 8:39 AM] Manoj Dubey: मोबाईल का निवेदन 


कल मैंने अपने मोबाईल

को पहली बार अलग किया

दिन भर मैने उसे और

उसने मुझे मिस किया

मै जब पाच छह घंटे बाद

मिला उससे घर जाकर

हमने एक दूसरे का गिला

शिकवा दूर किया


पहले तो जाते ही मैने

 सब कामो को छोडा

अपने मोबाइल को

 हाथो मे लेकर देखा

आज मैने अपने बच्चे

बीबी की पहले खबर नही ली

सबसे पहले अपने।

मोबाइल की ही सुध ली

आधे घंटे तक मैने उसे

भरपूर स्नेह किया

दिन भर मे जो जो

अपडेट। था उन 

सबको चैक किया

मोबाइल के इस साथ ने भाई

साहब दिनभर का टेंशन

दूर कर दिया और मेरे खिन्न

 उदास मन मे जीवन

 संचार कर दिया

मेरा स्नेह उसकी स्क्रीन पर

 बरबस ही आंसू बन बरस गया

मोबाइल भी मुझे अपनी रिंग

 टोन   से बराबर अपडेट कर 

 स्नेह करता गया

कहने लगा दुबे जी आज पहली

बार तुमने मुझे इतनी दूर  किया

क्या तुमने मुझे दिन भर मे

 बिल्कुल भी मिस न किया

तुम्हारी एबशेंट मै

 तुम्हारे बच्चे मेरी बारह बजाते रहे

कभी लड़ते रहे ऐक दूसरे से तो मेरी

 बटनों को मोड़ते रहे

रिकार्डिंग  फोटो खीच खींचकर

 उन्होने दिमाग 

 ही खराब कर  दिया

और बचा खुचा था जो

भाभी की किट किट

ने नाश कर दिया

मै दिन भर अशांत खिन्न खिन्न

तुम्हारे बिन उदास उदास सा रहा

आपके साथ के सुख शांति के

 ऐहसास को तरसता रहा 

मैन कहा मै भी तुम्हारे

बिन कहा सुखी रहा

दिन भर तुम्हारी रिंग टोन

 मेसेज टोन फेस बुक वाटस।

अप को मिस करता रहा

क ई बार जब मे हाथ जाने पर

डरता सहमता गया

कोई चुरा न ले गया हो तुम्हे

  मुझसे सोच सोच डरता गया

तुमहारे बिन मुझे कुछ भी

बिलकुल न अच्छा लगा

कालखंड मानो  महीनो वर्षो

सदियोसा बीतने लगा

 सच पूछो तो मेरा मन भी दिन।

 तुम्हारी यादो बयाकुल   रहा

लेकिन दुबे जी मुझे घर पर

छोडने का कुछ खास कारण

 बताईए और क्या हुआ।।

अपराध मुझे भी बताईए

मैने मोबाइल को सब कुछ

स्पष्ट बता दिया और रहेंगे अब

ऐसे ही दूर ऐक दूसरे से समझा दिया

मेरी इस बात पर मोबाईल

 सिसकने लगा हाथ जोड़कर

 कहने लगा दुबे जी ऐक

 निवेदन मेरा सर तक पहुँचा देना

जितना जल्दी हो सके मुझेसे

 प्रतिबंध हटवा लेना उनसे कहना 

स्कूल के बंद बाक्स

 मे मेरा दम घुटता है

 मुझे तो बस आपके जैब के।

पास का स्थान ही अच्छा लगता है 

यदि आप घर पर छोडकर

आए तो यह जुल्म सह न सकूंगा

और आपके बिना मै एक पल भी

रह ना  सकूँगा 

 क्योंकि आप सबके

घर के बीबी बच्चो 

टीवी की चककलस ।

ज्यादा दिनो तक मै भी

सह न पाऊंगा

मेमोरी भराने के पहले ही मै

पूरा का पूरा हैंग हो जाऊंगा 


मनोज दुबे श्रीकांत

[4/5, 9:48 AM] Manoj Dubey: # नमन मंच 

साहित्य संगम संस्थान मध्यप्रदेश इकाई 

विषय परीक्षा 

विधा कविता 

दिनांक 05-04-21


प्रश्न पत्र देखकर क ई

छात्रों के होश उड़ ग ए

चेहरों रंग उनके पीले पड ग ए

भरी शरदी मे माथे पर

पसीने की बूंदे झलक रही थी

उत्तर लिखने मे बुद्धी कुछ

काम नही कर रही थी

कोई घुमा रहा था पेन तो

कोई कापी के पन्ने उल्ट रहा था

कोई खिडकी के बाहर होती।

हलचल को देख रहा था

सब एक दूसरे की बगले

 झांक रहे थे प्रश्नो के उत्तर

एक दूसरे से पूछने की कोशिश।

कर ही रहे थे कि

कक्षा मे हमने एंट्री मारी सबकी 

ओर एक नजरे डाली

कैमिस्ट्री की कक्षा की साल

भर की कारीगरी समझ आ रही थी

 और केमेस्ट्री का पंडित जिसे

समझते थे जिसे 

उसकी भी दाल गलती

 नही नजर आ रही थी 

हर एक प्रश्न डिसेंट था

फिजिकल इन आर्गेनिक और

आर्गेनिक केमेस्ट्री का क्या मेंटर था।

 रिक्षाजंली  परिक्षा 

बोध प्रश्न बोध के

साथ  केमेस्ट्री के पंडित की गेसीग

चारो खाने चित्त पड़ी थी

बच्चोके लिए पास की जुगाड़

इस समय बड़ी थी उनकी इस

परेशानी को हमारी एंट्री ने और

बढा दिया था जो कुछ याद था

उसे भी भुला दिया था हमने

कहा बेटा घर की मुर्गी दाल के 

बराबर समझते रहे

हमारीडिग्रियों अनुभव

 को धत बताकर 

 हमारी खिल्ली उडाते रहे।

हमारा अनुभव हमारे प्रश्न पत्र मे

बोल रहा है ओर टेसट तिमाही

 छमाही प्री बोर्ड परिक्षा मे

 तुमहारे राज खोल रहा है

अभी तो यह टैलर था 

पिक्चर अभी बाकी है

बोर्ड परिक्षा के पेपर की

झांकी और परिक्षा परिणाम बाकी है

हिसाब सबका  वैसे तो।

हम पूरा कर देगे और बचा खुचा

जो रह गया उसे बजरंग बली

 समझ लेंगे

सुंदर कांड बजरंग बाण

 हनुमान चालीसा सब

हनुमान जी को खेड़ापति

 मंदिर मे सुना आना

और परिक्षा परिणाम

 सही रहे अपना इसलिये

ग्यारह रूपये ओर  

एक एक नारियल सब

चढा आना 


मनोज दुबे श्रीकांत

होशंगाबाद ( म प्र)

[7/2, 12:30 PM] Manoj Dubey: श्वान बच्चों की आशा 


सकूल जाते देख हमारे 

मोहल्ले का कुत्ता 

दुम हिलाते आया

 बहुत दिनो बाद 

आपको सकूल  

जाते देखरहा हू फरमाया

 क ई दिनो‌ से लाकडाऊन 

के चलते आपने 

पारले बिस्कुट नही खिलाया 

मेरी डाली के बच्चों को भी 

प्रेम  से नही सहलाया 

आज उन्हें जाकर 

खुशखबरी सुनाऊगा 

दुबेज्ञजी स्कूल जाने लगे हैं

 कल से दूध बिस्किट सब

 खिलाऊगा  

अब हमारे मुफलिसी के दिन 

मिट ग ए  है और दुबे जी  

अब पुन सकूल जाने  लगे  हैं

सकूल से लोटते वक्त चेहरे पर 

तनाव झलक रहा था स्वान 

परिवार गेट पर ही 

रास्ता देख रहा था 

कहने लगा दुबे जी  इस बार 

तो फुल पेमेट पर जा रहे होगे 

लाकडाऊन के बहुत 

दिनो बाद पपगार पा रहे होगे 

मैने थके मन से कहा नही रे अपन‌

तो करोना और्

 लक्षमी के सताए बदे है 

सकूल कोचिंग पढाई

 लिखाई के मंद धंधे  है 

लाक डाऊन का दर्द थकावट 

मजबूरी मे  चेहरे 

पर झलक रहा था 

हमारे हाल देखकर कुत्ता 

का परिवार भी मायूस हो रहा था 

ऐक दुबला पतला सा 

बच्चा निकलकर  दुबे जी 

कल से भी  हमे दूध बिस्किट

 नही मिलेगे मुझसे कह रहा था

मेरी आंखों मे डाग

 सन के प्रति 

कर्तव्य निष्ठा और 

प्रेम झलक रहा था 

कम वेतन का दर्द भूलकर 

उन कुतते के बच्चों को रोज 

दूध बिस्किट खिला रहा था्

 इसका असर मेरे घर परिवार 

पर दिख रहा था और भाई साहब 

 लाकडाऊन‌और करोना 

काल मे भी मेरा घर 

 ईशवर  की कृपा से बिंदास चल रहा था ..........

मनोज दुबे श्रीकांत होशंगाबाद जिला मप्र

[9/12, 6:20 AM] Manoj Dubey: यह कविता केवल हास्य और व्यंग के लिए है इसे पढकर केवल आनंद ले किसी पर किसी प्रकार का व्यंग नही है 


हाल ए प्रश्न पत्र 


।प्रश्न पत्र देखकर क ई

छात्रों के होश उड़ ग ए

चेहरों रंग उनके पीले पड ग ए

भरी शरदी मे माथे पर

पसीने की बूंदे झलक रही थी

उत्तर लिखने मे बुद्धी कुछ

काम नही कर रही थी

कोई घुमा रहा था पेन तो

कोई कापी के पन्ने उल्ट रहा था

कोई खिडकी के बाहर होती।

हलचल को देख रहा था

सब एक दूसरे की बगले

 झांक रहे थे प्रश्नो के उत्तर

एक दूसरे से पूछने की कोशिश।

कर ही रहे थे कि

कक्षा मे हमने एंट्री मारी सबकी 

ओर एक नजरे डाली

कैमिस्ट्री की कक्षा की साल

भर की कारीगरी समझ आ रही थी

 और केमेस्ट्री का पंडित जिसे

समझते थे जिसे 

उसकी भी दाल गलती नही नजर आ रही थी 

हर एक प्रश्न डिसेंट था

फिजिकल इन आर्गेनिक और

आर्गेनिक केमेस्ट्री का क्या मेंटर था।

 रिक्षाजंली  परिक्षा बोध प्रश्न बोध के

साथ  केमेस्ट्री के पंडित की गेसीग

चारो खाने चित्त पड़ी थी

बच्चोके लिए पास की जुगाड़

इस समय बड़ी थी उनकी इस

परेशानी को हमारी एंट्री ने और

बढा दिया था जो कुछ याद था

उसे भी भुला दिया था हमने

कहा बेटा घर की मुर्गी दाल के 

बराबर समझते रहे

हमारीडिग्रियों अनुभव को धत बताकर 

 हमारी खिल्ली उडाते रहे।

हमारा अनुभव हमारे प्रश्न पत्र मे

बोल रहा है ओर टेसट तिमाही

 छमाही प्री बोर्ड परिक्षा मे

 तुमहारे राज खोल रहा है

अभी तो यह टैलर था पिक्चर अभी बाकी है

बोर्ड परिक्षा के पेपर की

झांकी और परिक्षा परिणाम बाकी है

हिसाब सबका  वैसे तो।

हम पूरा कर देगे और बचा खुचा

जो रह गया उसे बजरंग बली समझ लेंगे

सुंदर कांड बजरंग बाण हनुमान चालीसा सब

हनुमान जी को खेड़ापति मंदिर मे सुना आना

और परिक्षा परिणाम सही रहे अपना इसलिये

ग्यारह रूपये ओर  एक एक नारियल सब

चढा आना 


मनोज दुबे श्रीकांत

[9/12, 6:20 AM] Manoj Dubey: कुत्ते की जिद 


हमारे घर का कुता।

जिद पर अड़ा रहा 

रोटी के नाम पर दिन

भर भूखा पडा रहा

कहने लगा अब मे

रूखी रोटी नही खाऊंगा

अंडा मछली  दूध ब्रेड के साथ

पडोस वाले कुत्ते के समान।

पेडिगरी  खाऊंगा

खुद विगत क ई वर्षो

से माल उडा रहै हो

मेरे नाम से दो रोटी के

 टिक्कड़ पकडा रहे हो

तुम्हे पता है मेरे साथ के

जानी रोनी टिंगू मुटिया रहे है

दूध रोटी अंडा मांस सब खा रहै है

सादे खाने से मेरा तन

सूख रहा है और मेरा पर

 भी अब पहले जैसे

 झबरीला कहा रहा है

मैने कहा भैया मैने तो

पहले ही तुझे सम

बोला था तु कही और रह ले

समझाया था मगर तू मेरी।

सादगी पर रीझ गया था

पडोस वाली मंजिल को छोड

मेरे घर आ गया था

अब काहे को पछता रहा है

अपने भाग्य को कोस रहा है

मै प्राइवेट स्कूल का मास्टर तुझे

इतना ही सुख दे सकता हूँ

कम तनख्वाह मे रूखी

रोटी और ईमान

 का नमक दे सकता हूँ

मेरे साथ रहने पर तुझे।।

एक फायदा जरूर होगा

  तू नमक हलाल  ही होगा कभी।

नमक हराम न होगा

तेरी विरादरी का वफादारी का

ओहदा हमेशा कायम रहेगा

तू ईमानदारी की रोटी से

 बेईमानी के प्रदूषण से दूर होगा 


मनोज दुबे श्रीकांत

[9/12, 6:20 AM] Manoj Dubey: हमारे हमारे घर के कुत्ते ने कल हमे


 पहली बार प्रणाम किया


उसने दोनों पंजों को खींचकर


 सिर को अपने पंजे पर धरा


 मैंने कहा भैया आजकल


 यह सुबह-सुबह चरण


 वंदना क्यों हो रही है


 क्या तुम्हारी कहीं हमसे अटक रही है


या फिर हमारी श्रीमती से


आजकल खटक रही है


या फिर तुम अपने आप


 को उठाना चाह रहे हो


या फिर हमारा चमचा


 बनने की सोच रहे  हो


 हमारे इतना कहने पर वह


भौ भौ करने लगा गुस्से


में हमें इस कदर


डराकरककहने लगा


 दुबे जी भाभी जी की संगत में।


आप पूरे ही सठिया रहे हो


 हमें जरा सी बात पर


 सो सो बात सुना रहे हो


 भैया हमारी शराफत का


गलत फायदा मत उठाइए


 तुम्हें प्रणाम कर रहे हैं


 हम यह अपना अहोभाग्य मनाईए


हम कुत्ते  होनै को


तो सच्चे वफादार होते हैं


 मगर कुत्तेआई पर अपनी आ जाए तो


 सबसे खतरनाक होते हैं।




मनोज दुबे श्रीकांत

[9/12, 6:20 AM] Manoj Dubey: आन लाईन कलास का पंगा 


कल आन लाईन कलास मे

 हमने कैमरा आन करने का

 बोला कुछ छातरो का

 मन भय से डोला

 पंद्रह बीस छात्रों मे से

 क ईयो ने कैमरा नही खोला

दो चार छात्रों मे जिनने खोला

उनमे से किसी का

भाई बहन ही बोला

 ऐक छात्र की लिंक पर

उसका पेरेंट आ गया

मेऔर मेरे से ऊल जूलूल

बाते कहने लगा

विगत पंद्रह दिनो

 से मै ही बच्चे की

कलास जवाईन कर रहा हूँ

और आन लाईन कलास के

नेटवर्क मे उलझ रहा हूं

कभी कुछ समझ  नही आता है

 मेडम सर क्या पढा रहे है 

दिमाग मे नही आता है 

 और तो और आजकल स्कूल

प्रशासन फीस पर

दवाब बना रहा है

शिक्षको को पेमेंट देने

की बात बता रहा है

पर सर जी हमे पता है विदयालय

आपको कितना वेतन दे रहा

लाक डाऊन का भार हम

और आप पर एक सा पड रहा है

फीस जमा नही करने पर 

 बच्चे को आन लाईन

 कलास से भगा रहा है

वो तो आप ने कैमरा

आन करवा के

सबको आज देख लिया

वर्ना गुडडू उनके दोस्तो को

  बुला  रहा था

 और मैदान पर क्रिकेट क्रिकेट

 खेलने की बोल रहा था

अभी अभी आपकी कलास के

 तीन बच्चे मेरे घर

पर बतिया रहे है

और उनके  भाई

बहन कैमरा आफ

कर आन लाईन कलास

जवाईन रहे है

 सर जी लाकडाऊन मे

 हाफ पेमेट का दर्द हम

 भी समझ रहे है

 पर बच्चे तो बच्चे भाई बहन

 पेरेंट सभी आन लाईन

कलास सेत्रस्त हो रहे है

इस आन लाईन व्यवस्था ने

बच्चो को इंटर्नेट का कीडा बना दिया है

 पढना बढना रहा ऐक तरफ

पूरा फेसबूकिया बना दिया है

 मोबाईल हमारै घर मे कलेश

 का कारण बन गया है

 और सर जी  आजकल

हमारा बेटा हमारा ही बापबन गया है

 अब इस ताम झाम को

यही बंद कर दीजिए और सकूल

खोल कर  हमारे बच्चे को वही

अनुशासित शिक्षा और

 उज्जवल भविष्य दीजिए

 हमे पता है हमारे बच्चो को

आपकी रोक टोक डाट डपट

सजा दंड  और अनुशासन के

साथ सीखता है घर पर वो कहा

किसी की सुनता है किताब के

साथ साथ बसता कई दिनो से

 बंद पड़ा और मेरे बच्चे का

उज्जवल भविष्य केवल

मोबाइल पर ही अडा है

  सर जी हम आपकी साल

भर की  पूरी की

 पूरी फीस भर देगें

सर  गरआप हमे इस

 आन लाईन कलास की

मुसीबत पीछा छुड़ा देंगे 


मनोज दुबे श्रीकांत

Sunday, June 6, 2021

मै एक पौधा नन्हा सा

 मैं हूं एक का पौधा नन्हा मुन्ना सा भाई साहबआं

0गन में उगता या गमलों में तुम्हारे बच्चों सा भाई साहब

 न करता हूं जिद कभी अपने मन की होने पर 

ना मांगता हूं टॉफी बिस्किट मेगी पिज्जा  भाई साहब

  ऊगता हूं गमले  में या फिर कच्चे आंगन में

 देने को फूल दो या छांव सुख की भाई साहब

 कोई देखता है मुझे प्रेम से सींचता लगाता है

  कोई हीन दृष्टि से देख   जलता   है मन मे  भाई साहब


 मैं हाथ जोड़कर करना चाहता हूं बस विनती

  रह रहा हूं किसी कोने में तो मुझे पढ़ने दो भाई साहब



 नहीं काम का तो शुद्ध वायु करूंगा 

 फुलो सी   घर मे  मुस्कान बिखेर जाउगा  भाई साहब

 रहा काम का तो फूल के साथ फल दे जाऊंगा

 या आराधना को ईस को  दो फूल दे  जाऊंगा भाई साहब

 सूखकर झंकड हो ही गया आंगन के कोने में तो

 मर कर भी तापने को आग काष्ठ  भाई  साहब 

पालकर कीट पतंगो को तितलियों को  रंग बिरंगी छटा दिखा करके बच्चों को  खुशियां अपार  दे जाऊंगा  भाई साहब 

चिड़ियों की चहचहाहट और कोयल की कूक मीठी  कभी कभी  हुआ पौधे से पेड  तो सुना जाऊंगा भाई साहब 


पलने दो बढने दो मुझे पोधे से वृक्ष तो होने दो आगन का 

बुढापे मे  आपके बहुत का मै आऊंगा भाई साहब 


मनोज दुबे श्रीकांत

होशंगाबाद म प्र

होऊंगा पौधा बेल या रात रानी तुम्हारे आंगन का जब कभी 

 खुशबुओं से घर  मोहलले को महका जाऊंगा भाई साहब 

और हुआ गर  बड़ा फलदार  वृक्ष तो फल फ्रूट से घर भर  ताकत सो गुना दे हर एक को फफल की दे  जाऊंगा भाई साहब

 उम्मीद है आपसे   देखरेख  बस थोड़े  से जल की उससे क ई गुना आक्सीजन दे वातावरण शुद्ध  कर जाऊगा भाई साहब 

दे जाऊंगा एक ऐसी  याद जीवन मे  अपने होने की 

प्रकृति  से तुम्हारी एक मुलाकात करवा जाऊगा  भाई साहब

Saturday, June 5, 2021

लकड़हारा


लकड़हारा

काला बदन नंग धड़ंग सा 
कटीले शरीर लिए हुए सा
 घुसा एक मानव बन में
 जो दानव हुआ हुआ सा

दिए घाव उसने तन मे
चीखा मैऐ विदीर हुआ सा 
 रक्तरंजित हुआ जब मै 
 दाया हाथ कोई कटा सा

 रात भर सोया ना जंग
ल रहा डरा सहमा हुआ सा 
 बुलबुल और कोयल के मन
 अनजान में भरा हुआ सा 

 कौन है जो उजाड़ गया 
कोई शत्रु प्रबल हुआ सा
 साथी हमारा हरा भरा 
आज हमसे  बिछड़ा हुआ सा 

सब खड़े थे मूक  होकर
   शोक मे वन डूबा हुआ सा 
ना समझे जीव जंतु  कोई
  न दहाड़ा शेरखान सा 

यह चिंता सबके मन मे
 भय कुछ कुछ  अनझुआ सा 
 सुख शांति का यह बन 
लगा जो अब अशांत हुआ सा   

मनोज दुबे श्रीकांत
होशंगाबाद मप्र

Thursday, February 18, 2021

बाते कुछ शेष है

 


बाते कुछ शेष है.......... 



बातें जो बातें जो नहीं कह सके हम

घर में जवान होती बेटी से 

बराबरी से बैठते अपने बेटे से

 बातें जो नहीं कह सके हम 

आवारागर्दी करते मनचलों से

 पढ़ने की स्कूल जाते बच्चों से 

बातें जो नहीं कह सके हम 

घर से भागी बेटी से 

घर लाएं नवेली बहू से 

बातें तो नहीं कह सकते हम

 क्षेत्र के  चुने नेता से

तरक्की को तरसते शहर से 

बातें जो नहीं कह सकते हम

धर्म से जुड़ी परंपराओं से 

अंधविश्वास से लड़ती कुरीतियों से

 बातें जो  नहीं कह सकते हम

 भक्षक बने रक्षक से 

परिवार तोड़ते मुखिया से 

बाते जो नहीं कह सके हम

 बड़ बु बड़े द्धिजीवियों से 

पढ़कर पंडित बनते विद्वानों से

 बातें जो नहीं कह सके हम

 अपने   विश्वसनीय इष्ट से 

भक्ति के पथ  वाले संत से 

बाते जो नहीं कह सके हम 

लोलुपता के शिकार अपनों से 

परिवार की जड़ काटते भाइयों से 

बातें जो नहीं कह सकें हम 

अपनी कलम से अपनी भाषा के शब्दों से

 बातें जो नहीं कह सके हम

 प्रकृति से और उसकी आपदा से

  बातें जो नहीं कह सके हम जिंदगी से

 दिन बुलाई गई अंतिम सांसों से

 बातें बहुत ही रह जाती है अधूरी 

 सोचते रह जाते हैं  हम 

और जिंदगी हो जाती है पूरी 

बातें  वो शेप  चलती हैं हमारे बाद भी 

जो हम कह नहीं पाए  अपनो से 

वो अमर रहती हैं जताने को उन्हें 

जिन्हें हम बताना चाह कर भी नहीं बता पाए..................

मनोज दुबे श्रीकांत होशंगाबाद मप्र 


व्यंग

 [12/9/2020, 11:56 AM] Manoj Dubey: आन लाईन कलास का पंगा  कल आन लाईन कलास मे  हमने कैमरा आन करने का  बोला कुछ छातरो का  मन भय से डोला  पंद्र...