Friday, February 1, 2019

गजल


तुम्हारे सिवा और कोई नही

तुम हो खूबसूरत इसमे सवाल नही
तुम्हारे जैसी और कोई मिशाल नही

मन में सिर्फ हो और तुम्हरा नाम ही
किसी और का मन मे खयाल नही

आते हो तो भूल जाता हूँ सब कुछ
तुम्हारे सिवाय कोई और विचार नही

तुम्हरे आने से निखर जाता हूँ और
 तेल उपटन चंदन की कोई आश नही

तुम मिल जाते हो  अनायास कही भी
किसी   स्थान विशेष की बात नही

तुम्हारे मिलने से मिल जाता है सब
कुछ न मिलनै का मन मे मलाल नही

थामा है हाथ तुमने  ही मेरा जनमो से
तुम सा कोई जीवन मे हमराही नही

तुम हो सर्वेश्वर श्रीकांत के प्रभु सदा
तुम से दूर रहना पल भर मुनासिब नही

मनोज दुबे श्रीकांत 

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