तुम्हारे सिवा और कोई नही
तुम हो खूबसूरत इसमे सवाल नही
तुम्हारे जैसी और कोई मिशाल नही
मन में सिर्फ हो और तुम्हरा नाम ही
किसी और का मन मे खयाल नही
आते हो तो भूल जाता हूँ सब कुछ
तुम्हारे सिवाय कोई और विचार नही
तुम्हरे आने से निखर जाता हूँ और
तेल उपटन चंदन की कोई आश नही
तुम मिल जाते हो अनायास कही भी
किसी स्थान विशेष की बात नही
तुम्हारे मिलने से मिल जाता है सब
कुछ न मिलनै का मन मे मलाल नही
थामा है हाथ तुमने ही मेरा जनमो से
तुम सा कोई जीवन मे हमराही नही
तुम हो सर्वेश्वर श्रीकांत के प्रभु सदा
तुम से दूर रहना पल भर मुनासिब नही
मनोज दुबे श्रीकांत
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