Monday, February 25, 2019

मेरी बातो को तुम नजरअंदाज कर देना
मै कहू कुछ तो तुम मुझै  माफ कर देना

चलती हैं गृहस्थी तेरी और मेरी समझ सै
तालमेल मुझसे तुम अपना तुम लेना

रूठो तुम मनाऊ मै करके जतन कितने ही
मै रूठू तो तुम अपना  समर्पण कर लेना

कहना सुनना पहलू हैं अपने जौवन के
किस्सा कहानियों मे तुम संवाद कर लेना

रंग जीवन के बिखरते रहै आंगन में
मोती खुशियों के एक एक कर चुन लैना

कट जाएगी जिंदगी अपनी श्रीकांत ऐसे ही
वचन विवाह के कभी तुम पूरे कर लेना
मनोज दुबे श्रीकांत











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