मेरी बातो को तुम नजरअंदाज कर देना
मै कहू कुछ तो तुम मुझै माफ कर देना
चलती हैं गृहस्थी तेरी और मेरी समझ सै
तालमेल मुझसे तुम अपना तुम लेना
रूठो तुम मनाऊ मै करके जतन कितने ही
मै रूठू तो तुम अपना समर्पण कर लेना
कहना सुनना पहलू हैं अपने जौवन के
किस्सा कहानियों मे तुम संवाद कर लेना
रंग जीवन के बिखरते रहै आंगन में
मोती खुशियों के एक एक कर चुन लैना
कट जाएगी जिंदगी अपनी श्रीकांत ऐसे ही
वचन विवाह के कभी तुम पूरे कर लेना
मनोज दुबे श्रीकांत
मै कहू कुछ तो तुम मुझै माफ कर देना
चलती हैं गृहस्थी तेरी और मेरी समझ सै
तालमेल मुझसे तुम अपना तुम लेना
रूठो तुम मनाऊ मै करके जतन कितने ही
मै रूठू तो तुम अपना समर्पण कर लेना
कहना सुनना पहलू हैं अपने जौवन के
किस्सा कहानियों मे तुम संवाद कर लेना
रंग जीवन के बिखरते रहै आंगन में
मोती खुशियों के एक एक कर चुन लैना
कट जाएगी जिंदगी अपनी श्रीकांत ऐसे ही
वचन विवाह के कभी तुम पूरे कर लेना
मनोज दुबे श्रीकांत
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