Friday, February 15, 2019

गजल

अब ओर नही पुलवामा चाहिए

अब हमे और नही पुलवामा चाहिए
दुशमनो के कटे हुए शीश चाहिए

लेगे  बदला  शहीद बेगुनाहों का अब
खून की बूंद बूंद का हिसाब चाहिए

अमन चैन शांति सौहार्द की भावना नही
अब रण  भेरियो विजयी गूंज चाहिए

न रहै अब आतंक ओर न ही आतंकवादी
  अब सारा पाकिस्तान  ही साफ चाहिए

वतन परसतो के नाम पर पैरवी नही हो
370 और अलगाववाद का अंत चाहिए

तैयार है लडने को देश सारा श्रीकांत जंग
राजनेताओं ओर सेना का बस साथ चाहिए

मनोज दुबे श्रीकांत

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