Sunday, August 4, 2019

गजल

सभी मित्रजनो मित्रता दिवस की शुभकामनाएं

ये वादा हे मेरा

रहे  मेरा मित्र और मित्रता कुछ रहे न रहै
मेरे मित्र और मित्रता का संबंध अमर रहे

न रहे द्वेष कभी मेरे और उसके मन मन मे
मै रहू मित्र के दिल मे वो मेरे दिल मे रहे

चलती रहे कटटी गुस्सा का दोर कभी कभी
मेरा मित्र मन से  कभी मुझसे जुदा न रहे

हस्ते मुस्कुराते रहे सदा हिलमिलकर दोनो
सुखो की छाव रहे गम जरा भी न रहे

होगा न दूर पल भर को श्रीकांत तुझसे कभी
 वादे बचपन के बस एक दूसरे को याद रहे

मनोज दुबे श्रीकांत
सभी मित्रजनो मित्रता दिवस की शुभकामनाएं 

ये वादा हे मेरा 

रहे  मेरा मित्र और मित्रता कुछ रहे न रहै
मेरे मित्र और मित्रता का संबंध अमर रहे

न रहे द्वेष कभी मेरे और उसके मन मन मे
मै रहू मित्र के दिल मे वो मेरे दिल मे रहे

चलती रहे कटटी गुस्सा का दोर कभी कभी
मेरा मित्र मन से  कभी मुझसे जुदा न रहे

हस्ते मुस्कुराते रहे सदा हिलमिलकर दोनो
सुखो की छाव रहे गम जरा भी न रहे

होगा न दूर पल भर को श्रीकांत तुझसे कभी
 वादे बचपन के बस एक दूसरे को याद रहे

मनोज दुबे श्रीकांत

Saturday, August 3, 2019

गजल

एक तेरा गुस्सा

एक तेरा गुस्सा भी लाजमी था
मै भी तो आखिर आदमी ही था

घर गृहस्थी मे उलझाती रही तु
संसार  तो आखिर जाल ही था

तेल शक्कर दाल चावल  सब्जी
काटता रहा जैब तो तंगहाली ही था

ये मुआ मुह और दाल मसूर की
ढोऊ गधा गृहस्थी का तो मै ही था

डांटती रही डपटती रही लडती रही
 रूठने पर मनाने वाला  तो मे ही था

जप तप तेरा रहना दिन दिन भर भूखा
 पति तेरा और परमेशवर तो मै ही था

चलती रहे ऐसी ही श्रीकांत अपनी गाडी
एक चका.गृहसथी की तू दूजा मै ही था

मनोज दुबे श्रीकांत

व्यंग

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