Monday, February 25, 2019

गजल

बेकार हूँ मै

होने को  बिल्कुल बेकार हू मै
भरी दुपहरिया बेरोजगार हूँ मै

करने को कुछ काम नही पास
निजी संस्था का कामगार हूँ मै

भाग दोड मे लगा रहा दस महीने
दो महीने के लिए बेकार हूँ मै

जैबे तंग हाल रहती है आजकल
 पेकेज के जमाने तनखा हूँ मै

कैची करती है सितम वक्त वे वक्त
 पंजी मे एबसैंट एलबी डब्ल्यू हूँ मै

अनुशासन की पाबंदी की बेड़ियाँ
  किसी कोने मे टंगा कोई घंटा हूँ मै

बजा देता है कोई भी वक्त आने पर
 घड़ी मे गुजरता कालखंड हू मै

मत पूछो श्रीकांत से क्या मिला तुम्हे
गुजरते वक्त का एक कारवा हूँ मै

मनोज दुबे श्रीकांत

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