Friday, January 18, 2019

गजल


    अखबार वाला

समाचार जाने कितने दे गया
वो सुबह सुबह अखबार दे गया

हर खबरो का समावेश था उसमे
दुख सुख  वो सब साथ दे गया

राजनीति  साहित्य और समाज
 ज्ञान विज्ञान खेल की बाते दे गया

 साथ रंग बिरंगा सतरंगी सा पन्ना
 नए विज्ञापनों का पैगाम दे गया

 आवश्यकता  के कालम के संग
किसी नोकरी का अरमान दे गया

देश विदेश प्रदेश क्षेत्र की खबरे
वो चंद पन्नो मे घर बैठे दे गया

दैखतै है उठकर सुबह से पंचाग
किशमत के नए कनैक्शन दे गया

साधने को गृह नक्षत्र सबके
  हर रोज का राशि फल दे गया

चंद  पन्नो मे छपे शब्द श्रीकांत
वो अखबार मे दिन के  रंग दे गया

मनोज दुबे श्रीकांत






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व्यंग

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