मुस्कुराते बच्चे
बच्चो की मुस्काने मे ही भगवान बसते हैं
इनके खिलखिलाने से ही फूल खिलते हैं
अरमान पूरे उनके हो जाते हैं सारे पल में
जिनके घर और आगन में बच्चे खेलते हैं
सुख दुख गुजर जाते है धूप छाव से जीवन
समय के पाव को जैसे पंख लगने लगते हैं
सपने सतरंगी से आसमान मे बिखर जाते
दिन होली दीवाली और ईद से लगते हैं
रुठ जाए गर बच्चे तो मना लेना श्रीकांत
राम कृष्ण मंदिर मे नही बच्चो मे ही मिलते हैं
मनोज दुबे श्रीकांत
बच्चो की मुस्काने मे ही भगवान बसते हैं
इनके खिलखिलाने से ही फूल खिलते हैं
अरमान पूरे उनके हो जाते हैं सारे पल में
जिनके घर और आगन में बच्चे खेलते हैं
सुख दुख गुजर जाते है धूप छाव से जीवन
समय के पाव को जैसे पंख लगने लगते हैं
सपने सतरंगी से आसमान मे बिखर जाते
दिन होली दीवाली और ईद से लगते हैं
रुठ जाए गर बच्चे तो मना लेना श्रीकांत
राम कृष्ण मंदिर मे नही बच्चो मे ही मिलते हैं
मनोज दुबे श्रीकांत
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