Saturday, January 19, 2019

मुस्कुराते बच्चे

मुस्कुराते बच्चे

बच्चो की मुस्काने  मे  ही भगवान बसते हैं
इनके खिलखिलाने से ही फूल खिलते हैं

अरमान पूरे उनके हो जाते हैं  सारे पल में
जिनके घर  और आगन में बच्चे  खेलते  हैं

सुख दुख गुजर जाते है धूप छाव से जीवन
समय के पाव को  जैसे पंख लगने लगते हैं

सपने सतरंगी से आसमान मे बिखर जाते
दिन होली दीवाली और  ईद से  लगते हैं

रुठ जाए गर बच्चे तो मना लेना श्रीकांत
राम  कृष्ण मंदिर मे नही बच्चो मे ही मिलते हैं

मनोज दुबे श्रीकांत

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