सब तुम्हारे ही आसपास
सबकी लव स्टोरी घूमती कालेज के आसपास
पर मेरी स्टोरी तो केवल प्रिय तुम्हारे ही आसपास
तुम्हे पता है जबसे तुमने हाथ मेरा थामा
वक्त ठहर सा गया है प्रिय जबसे तुम्हारे ही आसपास
किताब रजिस्टर पेन और कालेज का कैप्सस
आगन मे बस सा गया है प्रिय तुम्हारे ही आसपास
नए नए फैशन के सूट और दुपट्टे पुराने से हो गए
जो सिंदूर बन बिखर गए हैं प्रिय तुम्हारे ही आसपास
परंपरा रीति रिवाज मे बंध कर सुहागन हुई जबसे
बिंब जीवन के कई निखरे हैं प्रिय तुम्हारे ही आसपास
गीत गजल छंद मुक्तक सी विधा तुम श्रीकांत की
रूप कविता के सारे बसे है प्रिय तुम्हारे ही आसपास
मनोज दुबे श्रीकांत
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