Monday, January 21, 2019

मुक्त गजल


सब तुम्हारे ही आसपास

सबकी लव स्टोरी घूमती कालेज के आसपास
पर मेरी  स्टोरी तो केवल प्रिय  तुम्हारे ही आसपास

तुम्हे पता है जबसे तुमने हाथ मेरा थामा 
वक्त ठहर सा गया है प्रिय जबसे तुम्हारे ही आसपास

 किताब रजिस्टर पेन और कालेज का कैप्सस
आगन मे बस सा गया है प्रिय तुम्हारे ही आसपास

नए नए फैशन के सूट और दुपट्टे पुराने से हो गए
 जो सिंदूर बन बिखर गए हैं प्रिय तुम्हारे ही आसपास 

परंपरा रीति रिवाज मे बंध कर सुहागन हुई  जबसे 
बिंब जीवन के कई  निखरे हैं प्रिय तुम्हारे ही आसपास 

गीत गजल छंद  मुक्तक सी विधा तुम श्रीकांत की
रूप कविता के सारे बसे है प्रिय तुम्हारे ही आसपास 

मनोज दुबे श्रीकांत

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