मै रहता हूँ तेरे दिल मे
मै रहता हूँ तेरे दिल मे सदा जमाने से
तु समझ न सका कभी मुझे जमाने से
लगा रहा रात दिन करता हाय हाय
फुर्सत नही मिली तुझे कमाने से
ढूढ लिए मंदिर मस्जिद चर्च गुरूद्वारे कई
भरमाते रहै लोग तुझे मुझसे मिलाने से
मिलता रहा हर शख्स मे कही न कही
इंकार करता रहा मुझे पहचानने से
पाकर के भी तु पाया न सका कभी मुझे
अटका रहा भटकता तू कई जमाने से
जान ले मान ले भाप ले अब मुझको
राम रहीम नानक ईशु मे ही जमाने से
मै बसता हूँ सदा तेरे ही दिल में श्रीकांत
देखता तू ही नही जाने क्यो जमाने से
मनोज दुबे श्रीकांत
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