अजीज है जो
हर कोई मुझे धोकर चला जाता है
मोटर गाड़ी कपडा बना जाता है
बिना सर्फ ऐरियल के चमकता हूँ मै
शब्दो से दो चार मुझे कर जाता है
नजाकत उसकी रह जाती कोने में
सरेयाम बैनकाब जो कर जाता है
मै मै और तु तु हैं गालिब जमाने में
फर्क मुझमे तुझमे हो ही जाता है
देखता हूँ बानगी हर एक शख्स की
जोहरी किसी हीरे का हुआ जाता है
क्या रंग तेरा क्या रंग है मेरा पानी मे
पानी जो निर्मल निश्चल सा रह जाता है
जख्म दे दे श्रीकांत जमाने कितने ही
अजीज है कोई सिराने दवा रख जाता है
मनोज दुबे श्रीकांत
हर कोई मुझे धोकर चला जाता है
मोटर गाड़ी कपडा बना जाता है
बिना सर्फ ऐरियल के चमकता हूँ मै
शब्दो से दो चार मुझे कर जाता है
नजाकत उसकी रह जाती कोने में
सरेयाम बैनकाब जो कर जाता है
मै मै और तु तु हैं गालिब जमाने में
फर्क मुझमे तुझमे हो ही जाता है
देखता हूँ बानगी हर एक शख्स की
जोहरी किसी हीरे का हुआ जाता है
क्या रंग तेरा क्या रंग है मेरा पानी मे
पानी जो निर्मल निश्चल सा रह जाता है
जख्म दे दे श्रीकांत जमाने कितने ही
अजीज है कोई सिराने दवा रख जाता है
मनोज दुबे श्रीकांत
No comments:
Post a Comment