गजल
देख ले मुझको एक बार आकर के
नजरो से अपनी नजरे मिलाकर के
बैठा हूँ मै बरसो से इंतजार मे तेरे
सुकून दिला दे दिल को आकर के
राह सूनी है सूना आगन अब तक
जमा दे रंग बसंती सा तू आकर के
रंग हरा लाल बिखरा दे जीवन में
जीवन पथ की संगनी होकर के
सुना है जमाने और उसकी बातो को
मिटा दे सब शंकाए तू आकर के
क्या जवाब दे श्रीकांत जमाने को
दे दे जवाब सारे तू ही आकर के
मनोज दुबे श्रीकांत
देख ले मुझको एक बार आकर के
नजरो से अपनी नजरे मिलाकर के
बैठा हूँ मै बरसो से इंतजार मे तेरे
सुकून दिला दे दिल को आकर के
राह सूनी है सूना आगन अब तक
जमा दे रंग बसंती सा तू आकर के
रंग हरा लाल बिखरा दे जीवन में
जीवन पथ की संगनी होकर के
सुना है जमाने और उसकी बातो को
मिटा दे सब शंकाए तू आकर के
क्या जवाब दे श्रीकांत जमाने को
दे दे जवाब सारे तू ही आकर के
मनोज दुबे श्रीकांत
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