Tuesday, January 22, 2019

कविता

 विद्यार्थियों  और अपने लिए  एक बार अवश्य पढ़ें
बातें याद आती है उनकी

सर मेडम ने बहुत समझाया पर नही हम समझे
 स्कूल कालैज लाइफ मे हम कुछ ऐसे थे बिगड़े
बदल न पाई हमे  सजा डाट और न मार इनकी
मम्मी पापा दादा दादी की प्रेम की बातो से अकडे

साल दर साल मसताते रहे हम बेफिक्र  होकर
दोसतो के संग धूमते फिरते  रहे हीरो  बनकर
नए शोक हमारे  पूरे करवाती रही चुपके से मम्मी
पता चलने पर फिजूल खर्ची पर पापा चाहे भडके

सुथार न पाई सीख हमे दादा की न पापा के ताने
 न ही सुधरे कभी हम रिजल्ट का परिणाम पाके
करते रहे ऐश सारे के सारे केरियर से दूर रहकर
अपने ही  दोसतो के बीच के स्वार्थ जाल में फसके

याद  आती है अक्सर दादा दादी पापा मम्मी की बाते
कक्षा के सर मेडम की डाटे और प्राचार्य की बाते
उलझी राहे जिंदगी की जब कठिन समस्या पाकर
देख रहे होता सब उल्टा पुलटा हम केवल पछता के

करने को कर जाते बहुत कुछ सरल राह अपनाकर
नाम करते जग में सबका रोशन अपना नाम कमाकर
मिल जाता सब कुछ सरल सहज तुम्हे जीवन मे अपने
रहते सदा माता पिता और गुरू के आज्ञाकारी बनके

मनोज दुबे श्रीकांत


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