तुम रहो आसपास ही
तुम रहो आस पास मेरे ही जहां मे रहू
तुम चलो मेरे साथ साथ ही जहा मै चलू
चुन लेना वो मोती अरमानो के बरसे जहां
समय की तातो का जाल मै जहा पर बुनू
कर लैना जीवन तरंग मयी सरिता सा तुम
प्रेम सागर सा बन जब जब भी मैं उमडू
कर लेना बाते दो चार जिंदगी की बैठकर
जिस दिन बैठकर पास मै सुकून से सुनू
सुख दुख जीवन के पहलू से गुजरनै लगे
जख्म मिलने पर कभी मैं मरहम सा रहू
थम जाएगा वक्त पल भर देखने को हमे
जब जब जहां भी साथ में मै तुम्हारे रहू
चल देना हाथ थामकर श्रीकांत कही भी
जब चाहे जहा जहा मै तुम्हे भी ले चलू
मनोज दुबे श्रीकांत
तुम रहो आस पास मेरे ही जहां मे रहू
तुम चलो मेरे साथ साथ ही जहा मै चलू
चुन लेना वो मोती अरमानो के बरसे जहां
समय की तातो का जाल मै जहा पर बुनू
कर लैना जीवन तरंग मयी सरिता सा तुम
प्रेम सागर सा बन जब जब भी मैं उमडू
कर लेना बाते दो चार जिंदगी की बैठकर
जिस दिन बैठकर पास मै सुकून से सुनू
सुख दुख जीवन के पहलू से गुजरनै लगे
जख्म मिलने पर कभी मैं मरहम सा रहू
थम जाएगा वक्त पल भर देखने को हमे
जब जब जहां भी साथ में मै तुम्हारे रहू
चल देना हाथ थामकर श्रीकांत कही भी
जब चाहे जहा जहा मै तुम्हे भी ले चलू
मनोज दुबे श्रीकांत
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