Friday, April 10, 2020

                     
                      खामोशी 

              

 लूंगी बनियान पर दिन गुजर जाता है
 पैंट शर्ट खूंटी पर नजर आता है 

घर की खिड़कियों से देखने पर अक्सर
 खाली रोड गुमसुम शहर नजर आता है

मजमा परिंदों का लगा है शाखों पर 
इंसान लांघ न अपनी दहर पाता है 

 घूमता है हर कोई पहनकर मास्क 
जाने कौन फिजा में जहर घोल जाता है

 कितना रहा शहर अब बीमार मेरा 
इसी उधेड़बुन में पहर बीत जाता है 

घड़ी दो घड़ी ठहर जाता है श्रीकांत 
शहर से जाने कौन गुजर जाता है

मनोज दुबे श्रीकांत 


5 comments:

  1. सर आपके नाम के पीछे श्रीकांत का क्या मतलब है..??

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  2. श्रीकांत मेरा उपनाम है

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  3. श्रीकांत मेरा उपनाम है

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  4. वाह...... ग़ज़ल का शुभारंभ । बहुत ख़ूब । बधाई ।

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