गजल
जंग
प्रधान ही है जो हमारे डट गए
लाक डाउन कर करोना से भिड़ गए
घृणा के कीड़े पडे इतने उनके
अवरोध बन जो सामने अड ग ए
करने को निकले विरोध रोड पर
फिर पीछे पुलिस के डंडे पड़ गए
भंग करने को लाकडाउन के सपने
पलकों से उनकी सारे झड़ गए
मिटाने चले हस्ती देश की श्रीकांत
देश की मिट्टी में ही शव बन गड़ ग ए
मनोज दुबे श्रीकांत
जंग
प्रधान ही है जो हमारे डट गए
लाक डाउन कर करोना से भिड़ गए
घृणा के कीड़े पडे इतने उनके
अवरोध बन जो सामने अड ग ए
करने को निकले विरोध रोड पर
फिर पीछे पुलिस के डंडे पड़ गए
भंग करने को लाकडाउन के सपने
पलकों से उनकी सारे झड़ गए
मिटाने चले हस्ती देश की श्रीकांत
देश की मिट्टी में ही शव बन गड़ ग ए
मनोज दुबे श्रीकांत

No comments:
Post a Comment