खामोशी
पैंट शर्ट खूंटी पर नजर आता है
घर की खिड़कियों से देखने पर अक्सर
खाली रोड गुमसुम शहर नजर आता है
मजमा परिंदों का लगा है शाखों पर
इंसान लांघ न अपनी दहर पाता है
घूमता है हर कोई पहनकर मास्क
जाने कौन फिजा में जहर घोल जाता है
कितना रहा शहर अब बीमार मेरा
इसी उधेड़बुन में पहर बीत जाता है
घड़ी दो घड़ी ठहर जाता है श्रीकांत
शहर से जाने कौन गुजर जाता है
मनोज दुबे श्रीकांत

सर आपके नाम के पीछे श्रीकांत का क्या मतलब है..??
ReplyDeleteश्रीकांत मेरा उपनाम है
ReplyDeleteश्रीकांत मेरा उपनाम है
ReplyDeleteवाह...... ग़ज़ल का शुभारंभ । बहुत ख़ूब । बधाई ।
ReplyDeleteBahut shandar dubeyji.
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