हर हर महादेव
रहे कर के मस्ती में सदा अपनी
वो भोले भंडारी शिव हो जाते हैं
गरल का घूंट पीकर के हलक मे
वो नीलकंठेशवर से हो जाते हैं
जन्मते ब्रह्म पालते विष्णु जहां में
वो हर के प्राण महाकाल हो जाते हैं
होते है रक्षक जब जीवन के तो
वो मृत्युंजय महादेव हो जाते है
दे देते वर में मांगने पर थोड़ा
वो औघणदानी शिव हो जाते हैं
बन राम के ईश्वर कामना को राम की
वो सागर तट रामेश्वर हो जाते है
देवों के देव बन करके श्रीकांत
वो देवाधिदेव महादेव हो जाते हैं
मनोज दुबे श्रीकांत
रहे कर के मस्ती में सदा अपनी
वो भोले भंडारी शिव हो जाते हैं
गरल का घूंट पीकर के हलक मे
वो नीलकंठेशवर से हो जाते हैं
जन्मते ब्रह्म पालते विष्णु जहां में
वो हर के प्राण महाकाल हो जाते हैं
होते है रक्षक जब जीवन के तो
वो मृत्युंजय महादेव हो जाते है
दे देते वर में मांगने पर थोड़ा
वो औघणदानी शिव हो जाते हैं
बन राम के ईश्वर कामना को राम की
वो सागर तट रामेश्वर हो जाते है
देवों के देव बन करके श्रीकांत
वो देवाधिदेव महादेव हो जाते हैं
मनोज दुबे श्रीकांत

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