Sunday, April 26, 2020

गजल

हर हर महादेव



रहे कर  के मस्ती में सदा अपनी
 वो भोले भंडारी शिव हो जाते हैं

 गरल का घूंट पीकर के  हलक मे
  वो नीलकंठेशवर  से हो जाते हैं

जन्मते ब्रह्म  पालते विष्णु जहां में
वो  हर के  प्राण महाकाल हो जाते हैं

 होते है रक्षक  जब जीवन के तो
वो मृत्युंजय महादेव हो जाते है

 दे देते  वर में मांगने पर थोड़ा
 वो औघणदानी शिव हो जाते हैं

बन राम के ईश्वर कामना को राम की
वो सागर तट रामेश्वर हो जाते है

 देवों के देव बन करके श्रीकांत
 वो देवाधिदेव महादेव हो जाते हैं

मनोज दुबे श्रीकांत

No comments:

Post a Comment

व्यंग

 [12/9/2020, 11:56 AM] Manoj Dubey: आन लाईन कलास का पंगा  कल आन लाईन कलास मे  हमने कैमरा आन करने का  बोला कुछ छातरो का  मन भय से डोला  पंद्र...