Thursday, April 30, 2020

गजल

निकलकर देखू बाहर

निकलकर देखू तो बाहर क्या हो रहा है
 चोक चोराह बाजार मे क्या चल रहा है

क्या खुली है  कोइ दुकाने कही की आज 
समोसा कचोरी और नमकीन मिल रहा है

 क्या किसी गली मोहल्ले के टप पर तुम्हारे
राजसी गुटका पान या जरदा मिल रहा है

  खुली है कही कलारी या मिल रही है कच्ची
बहुत दिनो से पीने का मन चल रहा है

 कहा लगे हैं बेरीगेट और पुलिस के जवान
देखू कोन कोन उनसे  बच के निकल रहा है

लाक डाउन के कहने क्या है अब श्रीकांत
हर कोई घर से निकलने को मचल रहा है

मनोज दुबे श्रीकांत

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