निकलकर देखू बाहर
निकलकर देखू तो बाहर क्या हो रहा है
चोक चोराह बाजार मे क्या चल रहा है
क्या खुली है कोइ दुकाने कही की आज
समोसा कचोरी और नमकीन मिल रहा है
क्या किसी गली मोहल्ले के टप पर तुम्हारे
राजसी गुटका पान या जरदा मिल रहा है
खुली है कही कलारी या मिल रही है कच्ची
बहुत दिनो से पीने का मन चल रहा है
कहा लगे हैं बेरीगेट और पुलिस के जवान
देखू कोन कोन उनसे बच के निकल रहा है
लाक डाउन के कहने क्या है अब श्रीकांत
हर कोई घर से निकलने को मचल रहा है
मनोज दुबे श्रीकांत
निकलकर देखू तो बाहर क्या हो रहा है
चोक चोराह बाजार मे क्या चल रहा है
क्या खुली है कोइ दुकाने कही की आज
समोसा कचोरी और नमकीन मिल रहा है
क्या किसी गली मोहल्ले के टप पर तुम्हारे
राजसी गुटका पान या जरदा मिल रहा है
खुली है कही कलारी या मिल रही है कच्ची
बहुत दिनो से पीने का मन चल रहा है
कहा लगे हैं बेरीगेट और पुलिस के जवान
देखू कोन कोन उनसे बच के निकल रहा है
लाक डाउन के कहने क्या है अब श्रीकांत
हर कोई घर से निकलने को मचल रहा है
मनोज दुबे श्रीकांत
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