घर का कामगार
लाकडाउन मे बेरोजगार हो गया हूँ
घर मे पत्नी का कामगार हो गया हूँ
झाड़ू पोछा से लेकर के कपड़े तक
गृहस्थी अब आधार का हो गया हूँ
जैब से हो गया हूं मै बिल्कुल कडका
रोटी संग राई का अचार हो गया हूँ
ताने मिल रहे अब पत्नी और बच्चो से
सो सुनार की एक लोहार हो गया हूँ
दुबले पर दो आषाढ से भारी है दिन
लंबे कार्यक्रम का आभार हो गया हूँ
बोलने पर भी बोलते नही श्रीकांत
किसी दुकान दार का उधार हो गया हूँ
मनोज दुबे श्रीकांत
लाकडाउन मे बेरोजगार हो गया हूँ
घर मे पत्नी का कामगार हो गया हूँ
झाड़ू पोछा से लेकर के कपड़े तक
गृहस्थी अब आधार का हो गया हूँ
जैब से हो गया हूं मै बिल्कुल कडका
रोटी संग राई का अचार हो गया हूँ
ताने मिल रहे अब पत्नी और बच्चो से
सो सुनार की एक लोहार हो गया हूँ
दुबले पर दो आषाढ से भारी है दिन
लंबे कार्यक्रम का आभार हो गया हूँ
बोलने पर भी बोलते नही श्रीकांत
किसी दुकान दार का उधार हो गया हूँ
मनोज दुबे श्रीकांत
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