मेरा निवेदन स्वीकार हो
प्रणय निवेदन मेरा स्वीकार हो
निर्मल निश्चल प्रेम स्वीकार हो
सात सगुण लग्न के शुभ दिन
हल्दी कुमकुम मेहंदी स्वीकार हो
मातृका गणेश पूजन मंडप में
पाणिग्रहण स्वीकार हो
विवाह के गठजोड़ मे मेरा
रिश्तो का बंधन स्वीकार हो
हल्दी टीके मेल मिलाप मे
परिवार का परिचय स्वीकार हो
फूलो की जयमाल के रूप मे
समर्पण दोनो का स्वीकार हो
अग्नि के समक्ष लिए सात फेरों में
सात वचनों का निर्वाहन स्वीकार हो
विवाह की रस्मों के बाद तुम्हें
मेरा घर परिवार स्वीकार हो
दांपत्य जीवन में अपने तुम्हें प्रिय
गृहस्थी का कर्तव्य पथ स्वीकार हो
साथ गर देती रहो हर जन्म मे
सात जन्मों का संबंध स्वीकार हो
मनोज दुबे श्रीकांत

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