डर डंडे से नही लगता बाबूजी
अब डर डंडे से नही मार से लगता है बाबू जी
डर भीख से नही भूख से लगता है बाबू जी
लाक डाउन मे बंद पड़े है घर महीने भर से
डर पुलिस से नही घरवाली से लगता है बाबू जी
इलाज कितना ही हो जाए बीमारी का कोई
डर कोरोना से नही कवारैंटाईन से लगता है बाबू जी
करने को कर दे इलाज किसी का भी डाक्टर
डर स्क्रीनिंग से नही हमलों से लगता है बाबू जी
कोरोना की लड़ाई लड़ ले सब हिलमिल कर श्रीकांत
डर धर्म से नही हिंदु मुस्लिम करने से लगता है बाबू जी
मनोज दुबे श्रीकांत

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