Friday, May 1, 2020

गज़ल


                        डर डंडे से नही लगता बाबूजी




 अब  डर डंडे से नही मार से लगता है बाबू जी
   डर भीख से नही भूख से लगता है बाबू जी

  लाक डाउन मे बंद पड़े है घर महीने भर से
   डर पुलिस से नही घरवाली से लगता है बाबू जी

    इलाज कितना ही हो जाए बीमारी का कोई
 डर कोरोना से नही कवारैंटाईन से लगता है बाबू जी

 करने को कर दे इलाज किसी का भी डाक्टर
डर स्क्रीनिंग से नही हमलों से लगता है बाबू जी

कोरोना की लड़ाई लड़ ले सब हिलमिल कर श्रीकांत
डर धर्म से नही हिंदु मुस्लिम करने से लगता है बाबू जी

मनोज दुबे श्रीकांत





 


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