सोलह श्रृंगार
सोलह श्रृंगार से आज फिर सजा दूं तुमको
सिंदूर और मांग का टीका लगा दू तुमको
नाक में पहना कर नथ आंखों में लगा दूं काजल
कानों में कर्णफूल और गले मे हार पहना दूं तुमको
बालों में लगाकर फूलो गजरा और केशपरचन
हाथों में बाजूबंद और चूड़ियां पहना दूं तुमको
अंगुली मे पहनाकर अंगूठी और कमर बंध कमर मे
पांव में पायल और बिछिया पहना दूं तुमको
पहनाकर लाल जोड़ा लगाकर शगुन की मेहंदी
सदा सुहागन और सौभाग्यवती बना दूं तुमको
आदित्य अनुपम अद्भुत श्रीकांत की तुम हो कविता
विविध प्रकार के अलंकारों से सजा दूं तुमको
मनोज दुबे श्रीकांत

वाह
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteवाह
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