आज संडे तुम मना ही लो
सब्र का इम्तहान अब तुम मेरा ले ही लो
आज चाहे जितना जी भर कर सो ही लो
उठ आया हू मै सुबह जल्दी से आज भी
तुम अपना भरपूर संडे तो मना ही लो
दूध लाकर बाजार से चाय बना ली मैने
तुम गर्मा गर्म चाय बिस्कुट तो ले ही लो
मुझे इंतजार है तुम्हारा उठकर कहने का
कुछ काम आज तुम भी तो कर ही लो
परेशान रहती हूं रोज के कामों से ही मै
बच्चो के कामों को आज तुम देख ही लो
सुधार कर कुछ सब्जी ओर भाजियो को
किचन थोड़ा सा तुम भी संभाल ही लो
रहतै हो तुम भी तो व्यस्त सप्ताह भर के
कुछ समय हमारे लिए भी तुम निकाल ही लो
कर देगा श्रीकांत काम सब तुम्हारे कविता
तुम्हे कहना है जो जो सब आज कह ही लो
मनोज दुबे श्रीकांत
सब्र का इम्तहान अब तुम मेरा ले ही लो
आज चाहे जितना जी भर कर सो ही लो
उठ आया हू मै सुबह जल्दी से आज भी
तुम अपना भरपूर संडे तो मना ही लो
दूध लाकर बाजार से चाय बना ली मैने
तुम गर्मा गर्म चाय बिस्कुट तो ले ही लो
मुझे इंतजार है तुम्हारा उठकर कहने का
कुछ काम आज तुम भी तो कर ही लो
परेशान रहती हूं रोज के कामों से ही मै
बच्चो के कामों को आज तुम देख ही लो
सुधार कर कुछ सब्जी ओर भाजियो को
किचन थोड़ा सा तुम भी संभाल ही लो
रहतै हो तुम भी तो व्यस्त सप्ताह भर के
कुछ समय हमारे लिए भी तुम निकाल ही लो
कर देगा श्रीकांत काम सब तुम्हारे कविता
तुम्हे कहना है जो जो सब आज कह ही लो
मनोज दुबे श्रीकांत
No comments:
Post a Comment