Saturday, March 9, 2019

गजल

आज संडे तुम मना ही लो

सब्र का इम्तहान अब तुम मेरा ले ही लो
आज चाहे जितना जी भर कर सो ही लो

उठ आया हू मै सुबह जल्दी से आज भी
तुम अपना भरपूर संडे तो मना ही लो

दूध लाकर बाजार से चाय बना ली मैने
  तुम गर्मा गर्म चाय  बिस्कुट तो ले ही लो

मुझे इंतजार है तुम्हारा उठकर कहने का
 कुछ काम आज तुम भी तो कर ही लो

परेशान रहती हूं रोज के कामों से ही मै
बच्चो के कामों को आज तुम देख ही लो

सुधार कर कुछ सब्जी ओर भाजियो को
किचन थोड़ा सा तुम भी संभाल ही लो

रहतै हो तुम भी तो व्यस्त सप्ताह भर के
कुछ समय हमारे लिए भी तुम निकाल ही लो


कर देगा श्रीकांत काम सब तुम्हारे कविता
तुम्हे कहना है जो जो सब आज कह ही लो

मनोज दुबे श्रीकांत 

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