पल दो पल को बैठ भी ले पास मेरे आकर
सुख दुख सारे बाट भी ले मेरे पास आकर
मै दे दूँगा तुझे सब कुछ सहजता से ही
छोटा बनकर माग भी ले मेरे पास आकर
रखूगा कुछ नही तेरा जो कुछ दिया लिया
हिसाब तेरा भी कर ले मेरे पास आकर
लेखा जोखा सब कुछ लिखकर बैठा हूँ मै
मिले जो तुझे ले भी ले पास मेरे आकर
स्वर्ग नर्क लोक परलोक बैकुंठ सब पास मे
फिर चाहे मुझको ही मांग ले पास मेरे आकर
मै राम कृष्ण शिव विष्णु ब्रम्हा सब कुछ हू
अनेक रूप देख तू भी ले पास मेरे आकर
तुम कर दोगे निहाल श्रीकांत को बिन मांगै
कभी जान लो हाल तुम भी मेरे पास आकर
मनोज दुबे श्रीकांत
सुख दुख सारे बाट भी ले मेरे पास आकर
मै दे दूँगा तुझे सब कुछ सहजता से ही
छोटा बनकर माग भी ले मेरे पास आकर
रखूगा कुछ नही तेरा जो कुछ दिया लिया
हिसाब तेरा भी कर ले मेरे पास आकर
लेखा जोखा सब कुछ लिखकर बैठा हूँ मै
मिले जो तुझे ले भी ले पास मेरे आकर
स्वर्ग नर्क लोक परलोक बैकुंठ सब पास मे
फिर चाहे मुझको ही मांग ले पास मेरे आकर
मै राम कृष्ण शिव विष्णु ब्रम्हा सब कुछ हू
अनेक रूप देख तू भी ले पास मेरे आकर
तुम कर दोगे निहाल श्रीकांत को बिन मांगै
कभी जान लो हाल तुम भी मेरे पास आकर
मनोज दुबे श्रीकांत
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