Monday, March 18, 2019

गजल

पल दो पल को बैठ भी ले पास मेरे आकर
सुख दुख  सारे बाट भी ले मेरे पास आकर
मै दे दूँगा तुझे सब कुछ सहजता से ही
छोटा बनकर  माग भी ले मेरे पास आकर
रखूगा कुछ नही तेरा जो कुछ दिया लिया
हिसाब तेरा भी कर ले मेरे पास आकर
लेखा जोखा सब कुछ लिखकर बैठा हूँ मै
मिले जो तुझे ले भी ले पास मेरे आकर
स्वर्ग नर्क लोक परलोक बैकुंठ सब पास मे
 फिर चाहे मुझको ही मांग ले पास मेरे आकर
मै राम कृष्ण शिव विष्णु ब्रम्हा सब कुछ हू
अनेक रूप देख तू भी ले पास मेरे आकर
तुम कर दोगे निहाल श्रीकांत को बिन मांगै
कभी  जान लो  हाल तुम भी मेरे पास आकर
मनोज दुबे श्रीकांत


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