Thursday, March 7, 2019

कविता

महिला दिवस की शुभकामनाएं

तुम मुस्कुराती रहो

तुम मुस्कुराती रहो फूलो सी
मै सुमनगंध बिखेरता रहूँ
खुशियों कै मोतियों को
 अपने आंगन मे बिखेरता रहूँ

  तुम बुनती गढती रहो ख्वाब
 मै साकार उन्हे करता रहूं
दामन तुम्हारा खुशियो से
 मै रोज रोज भरता रहूँ

 तुम चलती रहो तूलिका सी
मै कैनवास  सा होता रहू
जीवन के बेरंग बिम्ब मै
 सात रंगो उकेरता रहूँ

तुम होना रिमझिम फुहार
मै सावन सा होता रहूं
मेघदूत सा बन कर प्रिय
प्रेम को बरसाता रहूँ

 तुम  होना जूही लाजवंती सी
  मै बसंत सा होता रहूँ
होकर के रंग हरा लाल
फागुन मे बरसता रहूँ

तुम होना कभी  नदियो सी
 तो मै सागर सा होता रहूं
क्षितिज बन दूर  कही
आकाश धरा सा मिलता रहूँ

जीवन की परिणय बेला मे
 मै वचन सात सा होता रहू
थामकर हाथ तुम्हारा धामकर
बस दूर तक चलता ही रहू

तुम होना रिश्तो की कडी सी
मै घर  आंगन सा होता रहू
हौ संगनी तुम श्रीकांत की कविता
साथ  तुम्हारा ईश से मांगता रहूँ

मनोज दुबे श्रीकांत

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