लोग कहा अच्छे बुरे होतै है
अच्छे बुरे तो व्यवहार होते हैं
नीर के समान ढल जाते है
लोग जो मन से निर्मल होते हैं
कुछ सुनाकर निकाल लेते भडास
कुछ सुनकर खुश हो जाते है
मुद्दा ए बहस मे और के जनाब
रिश्ते कुछ खराब हो जाते है
क्या ईमान क्या धर्म क्या
राजनीति मे सब एक हुए जाते है
हुआ क्या पूछ तो ले हाल मेरा
कुछ लोग हवा हुए जाते है
कुछ चले गए कुछ जाने को है श्रीकांत
स्वर्ग नर्क सब एक हुए जाते है
मनोज दुबे श्रीकांत
अच्छे बुरे तो व्यवहार होते हैं
नीर के समान ढल जाते है
लोग जो मन से निर्मल होते हैं
कुछ सुनाकर निकाल लेते भडास
कुछ सुनकर खुश हो जाते है
मुद्दा ए बहस मे और के जनाब
रिश्ते कुछ खराब हो जाते है
क्या ईमान क्या धर्म क्या
राजनीति मे सब एक हुए जाते है
हुआ क्या पूछ तो ले हाल मेरा
कुछ लोग हवा हुए जाते है
कुछ चले गए कुछ जाने को है श्रीकांत
स्वर्ग नर्क सब एक हुए जाते है
मनोज दुबे श्रीकांत
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