Monday, March 4, 2019

गजल

तमन्ना
तमन्ना तो है  कि घुसकर मारकर आऊ
पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करके आऊ

आतंक की फैक्टरी के जो कारखाने बने
बम गोलो मिसाइल से उडाकर आऊ

एक कर  दू फिर  अपने हिंदुस्तान को
लाहोर कराची रावलपिंडी जीत कर आऊ

मागते है जो हिसाब शहादत का सेना से
लाश उनके ही घर पर बिछा मै के आऊ

राजनीति मे जो घसीट रहै है देश को
घसीट घसीटकर उनको मारकर आऊ

बढेते रहे आगे देश मेरा दिन ब दिन यू ही
गददारो को मन ही मन मै जलाकर आऊ

लडाते रहते जो हिंदु मुसलमान को देश मे
धर्मनिरपेक्षता का उनका मुखोटा लोचकर आऊ

गीत जो गा रहे  खाकर माल  अपने देश का
 उनको निकाल देश से पाकिस्तान छोडकर आऊ

तमन्ना श्रीकांत  बस इतनी चुनाव मे अबकी
हिसाब मांगने वालो का हिसाब पूरा कर आऊ

मनोज दुबे श्रीकांत
शनिचरा मोहल्ला कोरीघाट होशंगाबाद म प्र

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