Sunday, March 10, 2019

कविता

होनै को मै एक कुत्ता हू
कान सीधे दुम टेडी रखता हूँ
गुररा लेता हूँ कभी अपनो पर 
औरो पर भोक लेता हूँ

होने को मै एक कुत्ता  हू
जानी रोनी टाइगर  नाम  मेरे
पर गुस्सा मे कुत्ता
नाम से पुकारा जाता हूँ

होने को मै एक कुत्ता हूँ
करता हूं लाड प्यार
 चुकाने को नमक की कीमत
बदतमीजी करने पर काट लेता हूँ 

होनै को मै  एक कुत्ता हूँ
गली मोहल्ल का आवारा
मेम साहब का प्यारा 
मालिक का राज दुलारा हूँ 

होने को मै एक कुता हूँ 
देशी विदेशी शहर गाव का हूँ 
रहता बिल्डिंग मे घूमता कारो मे 
 अपने इलाके का बादशाह हूँ 

होनै को मै एक कुत्ता हूँ 
धर्म जाति आरक्षण मे बटा नही 
एक रंग मे रंगी अपनी
संस्कृति की पहचान हू 

 होनै को मै एक कुत्ता हूँ
सब जानवरों मे स्थान रखता हूं
आदम जात की मिशालो मे 
वपादारी का इनाम रखता हू

मनोज दुबे श्रीकांत 

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