Tuesday, March 19, 2019

मुक्त गजल

दर पर आने से पहलै अपना बटूआ नही दिल खोल लेना
मै नही तेरे रूपयो दो रूपयो का भूखा वो गरीबो को दे देना

मेरे दर पर दान देने वालो की लाइने लगी है लंबी और चोडी
तेरी सीरत को जरा उनकी सीरत से मिलाकर के देख लेना

ये दिखावै का दान धर्म प्रसाद मिन्नते रखले पास अपने ही
कभी कभी खाली हाथ  दर पर मेरे आकर के देख लेना

मै कर दूँगा हिसाब तेरा सब दिया लिया बराबर अब तक
फुर्सत मिलेगी दुनिया से तुझे तब मुझसे चैन से मिल लेना

लिखा रखा है मैनै लेख क ई जनमो का अपने बही खाते मे
अपने नसीब का ही तु हर जन्म मे मुझसे आकर के ले लेना

तु खीज लेना चिल्ला लेना कह देना मुझे भला बुरा क ई बार
सबक  पिछले जन्म के कर्मो का  एक बार तू देख लेना

मै तुझे दे सकता हूं स्वर्ग नर्क लोक परलोक धन दोलत सब
बस एक बार दू छोड छाड के सब  विकार मुझे अपना लेना

भगवान होते है अदितवीय अदभुद अतुलनय अनंत श्रीकांत
कभी प्रेम से तू उन्हे अपना बनाकर  के एक बार देख लेना

वो आएगै दोडे चले हरने को तेरे दुख दर्द और क्लेश सारे मन
कभी एक बार उन्हे अपने सच्चे मन से पुकार के तु देख लेना
मनोज दुबे श्रीकांत






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