तख्त ए ताज मेरा सब ले लो
तख्त ए ताज तुम मेरा सब ले लो
शहर गली मोहल्ला मेरा सब ले लो
छोड दो बस दो लबज मोहब्बत के
इश्क हुस्न शबाब मेरा सब ले लो
सबब इतना कि तु न ला मुझको
खत गुलाब डायरी मेरा सब ले लो
गुजरना न कभी भूलकर राहो से मेरी
चौक चोराह मंजिल मेरा सब ले लो
दे दो एक झरोका झाकने को तुम्हे
खिडकी दरवाजा मकान मेरा सब ले लो
छिपाकर भी छिपा न सकोगे तुम कभी
मोहब्बत के जो नाम दिया मेरा सब ले लो
जी लूंगी फकीरी मे ही जीवन को अपना
तुम नींद सुख चैन ख्वाब मेरा सब ले लो
मन्नत खुदा से मागती हूँ श्रीकांत हर वक्त ही
महफूज रखना उन्हे खुदा दुआ मेरी सब ले लो
मनोज दुबे श्रीकांत
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