Sunday, July 26, 2020

गजल

     घंटा गजल






नही कोई ज्ञान लिख रहै है  क्या घंटा गजल
तरननुम है नही गा रहे हैं  क्या घंटा गजल

न शेर  है न  शायरी है न  मिश्रे का कोई तुक
बिना रदीफ काफिए के है क्या घंटा गजल

बहर तुक मे आ नही रही कही से कही तक
  बे हया बेकार बेजार  है क्या घंटा गजल

न इश्क न मोहब्बत और नजाकत  की बाते
 गम ए  बेवफाई के बिना है क्या घंटा गजल

करते रहे गजल ऐक से बढकर एक श्रीकांत
मिले न दाद शेर पर तो है क्या घंटा गजल

मनोज दुबे श्रीकांत


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