भारत चीन के बिगडते रिश्ते
कहने को और क्या कह दू दोस्त तुझे
गददार एहसान फरामोस कह दू तुझे
लगाकर गले करता रहा वार पीठ पर
आस्तीनों का साप क्या कह दू तुझे
दूध मै अपने होथो से पिलाता रहा
तू सुधा को गरल सा करते रहा
नही समझा मेरे जजबातो को कभी
होकर के अजगर तू मुझे डसता रहा
अब बढा ली दुश्मनी जो तूने इतनी
की थी कभी दोस्ती तूने नही जितनी
देता है साथ आजकल मेरे दुश्मनो का
दोसती की कीमत थी क्या बस इतनी
मनोज दुबे श्रीकांत
कहने को और क्या कह दू दोस्त तुझे
गददार एहसान फरामोस कह दू तुझे
लगाकर गले करता रहा वार पीठ पर
आस्तीनों का साप क्या कह दू तुझे
दूध मै अपने होथो से पिलाता रहा
तू सुधा को गरल सा करते रहा
नही समझा मेरे जजबातो को कभी
होकर के अजगर तू मुझे डसता रहा
अब बढा ली दुश्मनी जो तूने इतनी
की थी कभी दोस्ती तूने नही जितनी
देता है साथ आजकल मेरे दुश्मनो का
दोसती की कीमत थी क्या बस इतनी
मनोज दुबे श्रीकांत

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