टपोरी गजल
ऐक लड़की अपनेको भी पटा दे बाबा
फूल प्रेम का दिल मे खिला दे बाबा
बरसो से घूम रहा हूँ बनकर टपोरी
ऐक गर्ल फ्रेंड् अपनी भी बना दे बाबा
निकलू घर से बाहर जब जब उसके
नजरो को बस दीदार करा दे बाबा
चोक चोराह स्कूल कालेज या मंदिर
ऐक बार कही तो उससे मिला दे बाबा
लगा कर कुछ जुगाड मेरी भी उससे
अब चक्कर अपना भी चला दे बाबा
कर दूंगा जैसा भी तु चाहेगा वैसा ही
उसको अपना सब कुछ बना दे बाबा
क्या क्या करू श्रीकांत उसको पाने को
मंत्र वसीकरण का अब तो बता दे बाबा
मनोज दुबे श्रीकांत

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