दरोड़ो के नाम
बहुत दिनों से नहीं मिली दर्शन हो
तरस रहे हैं हम तो घूंट पीने को
चढ़ाते थे बॉटल पर बॉटल उन दिनों
अब मिल भी नहीं रही चखने को
शौक था पीने को बियर व्हिस्की जिन रम
तरस गए हैं अब देखने भी कच्ची को
देखता हूं खाली गिलास बार-बार अपना
भूल गया उस्ताद साकी और पैमाने को
लॉक डाउन में ड्राई डे चल रहा ये कैसा
मजबूर. है सेनीटाइजर को सूंघने को
चलना डगमगा कर रोड पर बोलना अर बर
जा रहा है दरोड़ा तरस रहे सुनने को
सोचा ना था यह दिन भी आएंगे श्रीकांत
मिलेगी बस दवा और तरसेंगे हम दारु को
मनोज दुबे श्रीकांत
बहुत दिनों से नहीं मिली दर्शन हो
तरस रहे हैं हम तो घूंट पीने को
चढ़ाते थे बॉटल पर बॉटल उन दिनों
अब मिल भी नहीं रही चखने को
शौक था पीने को बियर व्हिस्की जिन रम
तरस गए हैं अब देखने भी कच्ची को
देखता हूं खाली गिलास बार-बार अपना
भूल गया उस्ताद साकी और पैमाने को
लॉक डाउन में ड्राई डे चल रहा ये कैसा
मजबूर. है सेनीटाइजर को सूंघने को
चलना डगमगा कर रोड पर बोलना अर बर
जा रहा है दरोड़ा तरस रहे सुनने को
सोचा ना था यह दिन भी आएंगे श्रीकांत
मिलेगी बस दवा और तरसेंगे हम दारु को
मनोज दुबे श्रीकांत

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