शुक्र है परिवार का
जमाने के सामने खुद बेईमान होते रहे
रिश्ते की अहमियत को समझा लाक डाउन में
जिंदगी भर अपने घर में मेहमान होते रहे
करती रही जी हजूरी हमारी आई जब से
कुछ उसके भी अधूरे अरमान होते रहे
समझ मे आया परिवार कोरोना काल में
परिवार के सदस्य अपने कदरदान होते रहे
कर लेते थे ना नुकुर पहले श्रीकांत उनसे
अब उनकी खिदमत पर मेहरबान होते रहे
मनोज दुबे श्रीकांत

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