लाकडाउन मे रियायत है क्या
लाक डाउन में तुम घर में पड़े रहे
खा खाकर दुश्मन अनाज के होते रहे
अब प्रीतम अपने काम पर लग जाओ
लाक डाउन हटा बाजार फिर से खुल रहे
अब सोओ तुम देर तक सुबह नो बजे तक
बॉस रास्ता तुम्हारी आफिस मे देख रहे
चाय नाश्ता भोजन सब कुछ दिया मैन
अब तुम्हारे दिन आराम के लद रहे
चाय पान चौराहे के मित्र बेचैन मिलने को
सब्जी राशन के झोले टंगने हाथ बेताब हो रहे
खिल खिलाकर यू बोली सखी से पत्नी सबकी
गुईया बड़े दिन बाद आज ये काम पर जा रहे
सब की पत्नियों ने ली सांस सुकून की श्रीकांत
बड़बड़ाते खिजियाते घर अब शांत हो रहे
मनोज दुबे श्रीकांत
लाक डाउन में तुम घर में पड़े रहे
खा खाकर दुश्मन अनाज के होते रहे
अब प्रीतम अपने काम पर लग जाओ
लाक डाउन हटा बाजार फिर से खुल रहे
अब सोओ तुम देर तक सुबह नो बजे तक
बॉस रास्ता तुम्हारी आफिस मे देख रहे
चाय नाश्ता भोजन सब कुछ दिया मैन
अब तुम्हारे दिन आराम के लद रहे
चाय पान चौराहे के मित्र बेचैन मिलने को
सब्जी राशन के झोले टंगने हाथ बेताब हो रहे
खिल खिलाकर यू बोली सखी से पत्नी सबकी
गुईया बड़े दिन बाद आज ये काम पर जा रहे
सब की पत्नियों ने ली सांस सुकून की श्रीकांत
बड़बड़ाते खिजियाते घर अब शांत हो रहे
मनोज दुबे श्रीकांत

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