ताश के पत्ते सा मै
कभी थे बादशाह घर के हम
आई बेगम तो गुलाम हो गए
गृहस्थी के कामकाज मे लग
किसी तुरुप के इक्के हो गए
नहला पर दहला मारते रहे लोग
पंजा छक्का से बेकार हो गए
उतार-चढ़ाव में जिंदगी के अक्सर
बाजार मे सट्टा अटठा के भाव गए
दिया नहीं किसी ने मान तो हम
अपमान से दुक्की तिक्की हो गए
होते रहे कभी अंदर कभी बाहर
जुए की फड़ के जो दाव हो गए
करने को टाईम पास बेकारी मे
पत्ते लाल काले पान ईट चूड़ी हो गए
मनोरंजन करने को लोगो के लिए
देहला बेगम पकड़ गुलाम चोर हो गए
पिसते रहे श्रीकांत जिंदगी के गेम मे
ताश की गड्डी के जो बावन पत्ते हो गए
मनोज दुबे श्रीकांत
कभी थे बादशाह घर के हम
आई बेगम तो गुलाम हो गए
गृहस्थी के कामकाज मे लग
किसी तुरुप के इक्के हो गए
नहला पर दहला मारते रहे लोग
पंजा छक्का से बेकार हो गए
उतार-चढ़ाव में जिंदगी के अक्सर
बाजार मे सट्टा अटठा के भाव गए
दिया नहीं किसी ने मान तो हम
अपमान से दुक्की तिक्की हो गए
होते रहे कभी अंदर कभी बाहर
जुए की फड़ के जो दाव हो गए
करने को टाईम पास बेकारी मे
पत्ते लाल काले पान ईट चूड़ी हो गए
मनोरंजन करने को लोगो के लिए
देहला बेगम पकड़ गुलाम चोर हो गए
पिसते रहे श्रीकांत जिंदगी के गेम मे
ताश की गड्डी के जो बावन पत्ते हो गए
मनोज दुबे श्रीकांत
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