हमारे हमारे घर के कुत्ते ने कल हमे
पहली बार प्रणाम किया
उसने दोनों पंजों को खींचकर
सिर को अपने पंजे पर धरा
मैंने कहा भैया आजकल
यह सुबह-सुबह चरण
वंदना क्यों हो रही है
क्या तुम्हारी कहीं हमसे अटक रही है
या फिर हमारी श्रीमती से
आजकल खटक रही है
या फिर तुम अपने आप
को उठाना चाह रहे हो
या फिर हमारा चमचा
बनने की सोच रहे हो
हमारे इतना कहने पर वह
भौ भौ करने लगा गुस्से
में हमें इस कदर
डराकरककहने लगा
दुबे जी भाभी जी की संगत में।
आप पूरे ही सठिया रहे हो
हमें जरा सी बात पर
सो सो बात सुना रहे हो
भैया हमारी शराफत का
गलत फायदा मत उठाइए
तुम्हें प्रणाम कर रहे हैं
हम यह अपना अहोभाग्य मनाईए
हम कुत्ते होनै को
तो सच्चे वफादार होते हैं
मगर कुत्तेआई पर अपनी आ जाए तो
सबसे खतरनाक होते हैं।
मनोज दुबे श्रीकांत

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