यह देख हमारा माथा ठनक
गया हमने उसे चमकाया
डाटते हुए धमकाया
नालायक हमारे घर की
खाकर हमे ही आख दिखाता है
किसी और को नही हमे ही काटता है
क्या तू आजकल नमक
हराम हो गया है या हमारे
लाड प्यार टुकड़े को भूल गया है
जा भाग जा तेरे को जहा जाना
हो वहा जा मेरे घर मे।
कल से मुह न दिखा
मेरी इस बात पर वह डरने लगा
आख मे आसू ला कहने लगा
भैया तुम मेरी जरा सी गलती
पर ही मुझे घर से भगाने लगे
एक दात लगने पर ही हंगामा करने लगे
दुबे जी मेरे देश के कुछ लोग
भी आज मेरे देस के लोगो
को मार काट रहे हैरह रहे है।
यहा मगर बात कही
ओर की कर रहे हैं उनके
लिए क्या आपका कोई उसूल
कानून नही है या आप उन
पर कार्यवाही या देश से
निकालने के काबिल नही है
आजादी के नाम पर देश मे
यह सब क्या चल रहा है।
दंगे फसाद देख देख कर
मेरा खून जल रहा है मेरी।
गलती माफ कीजिए दुबे जी।
और जाकर अपना घर गृहसती।
का काम कीजिए दुबे जी तुम्हे
सिर्फ हम कुत्तों के ऊपर ही।
शेर बनना आता है देश हित
के नाम पर तुम्हारा
खून जाने क्यू सूख जाता है
थोड़ा सा अपना शेर पना देश
के गद्दारों को भी दिखा दीजिए।
हम कुत्तों पर कब तक सनक
कर घर से भगाते रहेगे
कुछ मेरे देश के दुश्मन को
भी देश के घर से भगा दीजिये
मनोज दुबे श्रीकांत
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