कुत्ते की जिद
हमारे घर का कुता।
जिद पर अड़ा रहा
रोटी के नाम पर दिन
भर भूखा पडा रहा
कहने लगा अब मे
रूखी रोटी नही खाऊंगा
अंडा मछली दूध ब्रेड के साथ
पडोस वाले कुत्ते के समान।
पेडिगरी खाऊंगा
खुद विगत क ई वर्षो
से माल उडा रहै हो
मेरे नाम से दो रोटी के
टिक्कड़ पकडा रहे हो
तुम्हे पता है मेरे साथ के
जानी रोनी टिंगू मुटिया रहे है
दूध रोटी अंडा मांस सब खा रहै है
सादे खाने से मेरा तन
सूख रहा है और मेरा पर
भी अब पहले जैसे
झबरीला कहा रहा है
मैने कहा भैया मैने तो
पहले ही तुझे सम
झाया था तु कही और रह ले
समझाया था मगर तू मेरी।
सादगी पर रीझ गया था
पडोस वाली मंजिल को छोड
मेरे घर आ गया था
अब काहे को पछता रहा है
अपने भाग्य को कोस रहा है
मै प्राइवेट स्कूल का मास्टर तुझे
इतना ही सुख दे सकता हूँ
कम तनख्वाह मे रूखी
रोटी और ईमान
का नमक दे सकता हूँ
मेरे साथ रहने पर तुझे।।
एक फायदा जरूर होगा
नमक हलाल होगा कभी।
नमक हराम न होगा
मनोज दुबे श्रीकांत

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