Sunday, January 5, 2020

कविता सी ए ए

         सी ए ए के नाम पर



क्यो तोड़ रहे हो देश सी ए ए के नाम पर
क्यो लगा रहे हो आग सी ए ए के नाम पर

बहुत होगया उत्पाद अब और  बर्दाश्त नही
क्यो कर रहे हो तांडव  सी ए ए के नाम पर

करते हो बात तुम सब मिल कर एकता की
क्यो बाट रहे हो देश सी ए ए के नाम पर

कोई नही भय है जब कानून से देश मे अपने
 क्यो काप रहे हो  सी ए ए के नाम पर

कहते हो तुम सब देश भक्त हो  एक दम पक्के
 क्यो बन रहे हो गद्दार सी ए ए के नाम पर

कहते हो लोकतंत्र के पुजारी अपने आप को
 क्यो  संसद का अपमान   सी ए ए के नाम पर

बदनाम किया बहुत देश तिरंगा और बापू को
क्यो खेले हिसा  का खेल सी ए ए के नाम पर

ये कुर्सी और वोट बैक सब धरा रह जाएगा
क्यो पब्लिक को बने मूर्ख  सी ए ए के नाम पर

बाट गए देश पहले ही धर्म के नाम  उनने  ही
  क्यो कर रहे हाहाकार  सी ए ए के नाम पर

एक देश एक कानून ऐक संविधान देश का
क्यो राग अलापे  राज्य सी ए ए के नाम पर

राष्ट्र वाद देश हित की खातिर मिट जाएगे श्रीकांत
बटने न देगे देश हम  फिर सी ए ए के नाम पर


मनोज दुबे श्रीकांत










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